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श्रीराम के आदर्शो को अपनाने से इहलोक ओर परलोक दोनों सुधरते हैं: आचार्या सुलभा शास्त्री

Anjali Tyagi
27 March 2026 1:21 PM IST
श्रीराम के आदर्शो को अपनाने से इहलोक ओर परलोक दोनों सुधरते हैं: आचार्या सुलभा शास्त्री
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श्रीराम का जीवन विश्व के प्रत्येक मानव के लिये अनुकरणीय है- डा प्रतिभा सिंघल

गाजियाबाद। शुक्रवार को आर्य समाज अवंतिका, यज्ञ योग कार्यशाला, दयानन्द पार्क में राम नवमी पर्व हर्षोल्लास से सम्पन्न हुआ।आचार्या सुलभा शास्त्री के ब्रह्मत्व में महायज्ञ हुआ जिसमे मुख्य यज्ञमान श्रीमती सविता सिंह, राजपाल सिंह,उषा तोमर,वेद प्रकाश तोमर आदि रहे।वेद पाठ गुरुकुल की ब्रह्माचारिणियों जाग्रति आर्या एवं हेमलता आर्या ने किया। आचार्या सुलभा शास्त्री द्वारा श्रीराम महिमा के "मेरे राम के गीत गाकर के देखो" आदि मनमोहक भजनों की प्रस्तुति की गई जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए।

दशरथ नंदन श्रीराम अत्यन्त अदभुत सर्वगुणसंपन्न हैं

यज्ञ की ब्रह्मा एवं मुख्य वक्ता आचार्या सुलभा शास्त्री ने रामनवमी की शुभकामनायें देते हुए कहा कि पर्व जीवन में पूर्णता लाता है। दशरथ नंदन श्रीराम अत्यन्त अदभुत सर्वगुणसंपन्न हैं। वे वेदवेदांग के तत्वज्ञ,वेदविद्या के रक्षक,धर्म के साक्षात् स्वरूप, आर्यसभ्यता का प्रकाश करने वाले सूर्यवंशप्रभाकर और लोकदिग्विजयी थे। वे मर्यादा व्यवस्थापक,एकपत्नीव्रती, प्रजापालक नरेश,सन्तानवत्सल पिता थे। कोई ऐसा दिव्य गुण और प्रतिभा नहीं हैं,जो श्रीरामचन्द्र में दिखाई न दे। उनकी प्राप्ति महाराज दशरथ को पुत्रेष्ठी यज्ञ से हुई थी जोकि राजगुरु वशिष्ठ के कहने पर राजा दशरथ के श्रृंगी ऋषि से विनम्र निवेदन पर सरयू नदी के किनारे लगभग 9 लाख वर्ष पूर्व त्रेता युग में कराया था। उनका पूरा जीवन यज्ञमय और प्रजा की रक्षा हेतु था। वे प्रतिदिन पंच महायज्ञ का पालन करते थे। राजगुरु विश्वामित्र सहित सभी की योजना यह थी कि किसी भी प्रकार श्रीराम और लक्ष्मण द्वारा यज्ञ आदि श्रेष्ठ कार्य में विघ्न डालने वाले असुरों का सफाया किया जाए। सभी को युवा धनुर्धारी श्रीराम और लक्ष्मण पर पूर्ण विश्वास था। महाराजा दशरथ के मोह से दूर करके दोनों बालवीरो को माता कैकेई द्वारा 14 वर्ष का वनवास और राजकुमार भरत का राज्याभिषेक करवाने की सुव्यवस्थित योजना लागू की गई। ऐसे उज्जवल चरित्र वाले श्रीराम के जीवन और कार्य को देखकर हमें बहुत बड़ी प्रेरणा मिलती है। राम ने यज्ञ की रक्षा की हमें भी यज्ञ की रक्षा करनी चाहिए इससे इह लोक ओर परलोक दोनों सुधरते हैं, उन्होंने राम के आदर्शो को जीवन में अपनाने का संकल्प कराया।

श्रीराम का जीवन विश्व के प्रत्येक मानव के लिये अनुकरणीय है

संरक्षिका डॉ प्रतिभा सिंघल ने कहा कि बाल्मीकि रामायण में महर्षि नारद ने श्रीरामचंद्र जी के बहुत सारे गुणों का वर्णन करते हुए उन्हें दृढ़ता में पर्वत के समान गंभीरता में समुद्र के समान शीतलता में चंद्रमा के समान बताया है उनके चारित्रिक गुणों को अपनाना चाहिए।तभी रामनवमी मनाना सार्थक होगा। उनका जीवन विश्व के प्रत्येक मानव के लिये अनुकरणीय है। आर्य केन्द्रीय सभा के अध्यक्ष सत्यवीर चौधरी ने आगामी कार्यक्रमों की सूचना दी।

संचालन करते हुए यशस्वी प्रधान वेद प्रकाश तोमर ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज में विघटन भाइयों के परिवारों में संपत्ति के वर्चस्व के लिए लड़ाई झगडे से केवल भगवान राम के आदर्शों पर चलकर ही मुक्ति पाई जा सकती है। उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेने के लिये अवंतिका की सारी टीम मंत्री सुरेंद्र सिंह,देवेंद्र तोमर,एसपी सिंह‌,सुमन जिंदल, सतीश आर्य, आदित्य वर्मा आदि सभी को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से सर्वश्री आर्य नरेन्द्र पांचाल,डा वीरेन्द्र नाथ सरदाना,डा प्रमोद सक्सेना,सुभाष शर्मा,मनोज त्यागी,आशा आर्या, कविता राठी,ज्ञान प्रभा बंसल,रेखा गर्ग,कृपाल सिंह,महिपाल सिंह, संजीव आर्य, प्रवीण आर्य एवं त्रिलोक शास्त्री आदि मौजूद रहे।


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