इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने मार्च 2025 में फैसला सुनाया था कि ऐसी हरकतें केवल 'बलात्कार की तैयारी' हो सकती हैं, 'कोशिश' नहीं।