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दंतेवाड़ा में 37 नक्सलियों का सरेंडर; अबूझमाड़ में ITBP का बेस तैयार, नक्सलियों का आखिरी गढ़ भी हुआ ध्वस्त

DeskNoida
1 Dec 2025 3:00 AM IST
दंतेवाड़ा में 37 नक्सलियों का सरेंडर; अबूझमाड़ में ITBP का बेस तैयार, नक्सलियों का आखिरी गढ़ भी हुआ ध्वस्त
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खास बात यह है कि सरेंडर करने वालों में 12 महिलाएं शामिल हैं और इन 37 में से 27 नक्सलियों पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद के सफाए की दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है। दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने हथियार डालकर सरेंडर कर दिया है। खास बात यह है कि सरेंडर करने वालों में 12 महिलाएं शामिल हैं और इन 37 में से 27 नक्सलियों पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वहीं दूसरी ओर, इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) ने नक्सलियों के सबसे कठिन और दुर्गम माने जाने वाले अबूझमाड़ इलाके में अपना अहम कैंप स्थापित कर दिया है। इस कदम के बाद नक्सलियों का आखिरी बड़ा इंटरस्टेट मूवमेंट कॉरिडोर सील हो गया है, जो नक्सल उग्रवाद के अंत की दिशा में निर्णायक प्रहार माना जा रहा है।

दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक गौरव राय के अनुसार, सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने राज्य सरकार की पुनर्वास नीति ‘पूना मारगेम’ के तहत आत्मसमर्पण किया है। उन्हें 50 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दी जाएगी, साथ ही रोजगार, कृषि भूमि और सामाजिक पुनर्वास से जुड़ी अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि लगातार चल रहे सुरक्षात्मक अभियानों और विकास कार्यों के चलते नक्सलियों का मनोबल टूट रहा है। इसी का नतीजा है कि पिछले 20 महीनों में दंतेवाड़ा में 508 से ज्यादा नक्सली सरेंडर कर चुके हैं, जिनमें से 165 पर इनाम था।

सरेंडर करने वाले कई नक्सली उन मुठभेड़ों में शामिल रहे हैं जिनमें सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। यह नक्सली मार्च 2020 में मिनपा मुठभेड़ और वर्ष 2024 के थूलथूली मुठभेड़ों में भी सक्रिय रहे थे। ऐसे मामलों में शामिल नक्सलियों का आत्मसमर्पण नक्सल संगठन के कमजोर होते ढांचे की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।

इसी बीच ITBP ने अबूझमाड़ में एक और बड़ा कदम उठाते हुए ‘लंका कंपनी ऑपरेटिंग बेस’ की स्थापना की है। 28 नवंबर को स्थापित इस बेस के साथ ITBP का एक साल का रणनीतिक विस्तार पूरा हो गया है। यह कैंप छत्तीसगढ़ पुलिस और जिला रिजर्व गार्ड (DRG) के साथ मिलकर संचालित किया जाएगा। यह महाराष्ट्र की सीमा से सिर्फ 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे नक्सलियों के इंटरस्टेट मूवमेंट पर पूरी तरह लगाम कस दी गई है।

यह इलाका पहले गढ़चिरौली, बीजापुर और तेलंगाना के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण ट्रांजिट रूट था। अब इस रूट के बंद होने से नक्सलियों की आवाजाही, रसद आपूर्ति और नेतृत्व संपर्क लगभग खत्म हो चुका है। वरिष्ठ नक्सली बसवराजू की बोटर हिल पर हुई मौत के बाद सुरक्षा बलों ने अभियान को तेज किया था और तीन महीने से कम समय में ITBP ने अपना 9वां कैंप स्थापित कर दिया।

इन घटनाओं के बाद यह साफ हो गया है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद लगातार अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। सुरक्षा बलों के रणनीतिक अभियान, विकास कार्यों की रफ्तार और स्थानीय समर्थन ने मिलकर नक्सलियों के अंतिम गढ़ को भी कमजोर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में शांति और विकास की नई शुरुआत देखने को मिलेगी, जिससे दशकों से हिंसा झेल रहे आदिवासी इलाकों को स्थायी राहत मिल सकेगी।

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