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स्पीकर ओम बिरला के दफ्तर में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गर्मागर्म हुई बहस! सदन की कार्यवाही शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित

Shilpi Narayan
4 Feb 2026 3:36 PM IST
स्पीकर ओम बिरला के दफ्तर में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गर्मागर्म हुई बहस! सदन की कार्यवाही शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित
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नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के दफ्तर में सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों पक्षों के बीच गर्मागर्म बहस हुई है। लोकसभा स्पीकर के कार्यालय में पक्ष-विपक्ष के सदस्यों में किताब बनाम किताब को लेकर यह बहस हुई है। इसका वीडियो सामने आया है, जिसमें कुछ सदस्य नारेबाजी करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो एक सांसद ने बनाया है। विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही आज शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित हो गई है।

सामाजिक न्याय को कमजोर किया गया

राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा के बाद अब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर हमला किया है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र पर हमले हो रहे हैं और सामाजिक न्याय को कमजोर किया गया। इस सदन में पांच मुद्दे रखूंगा। महिला आरक्षण तत्काल लागू हो। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल वोटबैंक की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। खडगे ने सरोजिनी नायडू के नेतृत्व का उदाहरण दिया और कहा कि सौ साल में संघ या बीजेपी, किसी ने कभी किसी महिला को नेतृत्व नहीं दिया।

LoP सिर्फ एक इंसान नहीं है

दरअसल, कांग्रेस MP प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि निशिकांत जी को तभी आगे लाया जाता है जब सरकार रुकावट डालना चाहती है। सरकार किसी मेंबर को पब्लिश हुई किताब से कोट नहीं करने दे रही है, लेकिन वह (BJP MP निशिकांत दुबे) हाउस में 6 किताबें लाते हैं और उनसे कोट करते हैं। यह सरकार दिखाना चाहती है कि पार्लियामेंट में सिर्फ उन्हीं का तरीका चलेगा। यह स्पीकर और पार्लियामेंट की बेइज्जती है। LoP सिर्फ एक इंसान नहीं है।

वह पूरे अपोजिशन को रिप्रेजेट करता है

वहीं प्रियंका ने आगे कहा कि वह पूरे अपोजिशन को रिप्रेजेट करता है। फिर से, वे देश के लोगों का ध्यान भटकाने के लिए नेहरू का जिक्र कर रहे हैं क्योंकि जनरल साहब ने देश की लीडरशिप के बारे में जो कहा था। क्या इंदिरा गांधी कभी कोई फ़ैसला लेने से पीछे हटीं? कभी नहीं। देश ऐसे नहीं चलता। आज उन्होंने जो किया वह यह दिखाने के लिए था कि हाउस में सिर्फ वही होगा जो वे चाहते हैं, और वे LoP को बोलने नहीं देंगे। यह बहुत सीरियस मामला है, और यह सबको समझना चाहिए। यह पहली बार है कि सरकार खुद नहीं चाहती कि हाउस चले।

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