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मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव! 190 सासंदों ने किया हस्ताक्षर, इतिहास में यह पहली बार...

नई दिल्ली। पिछले काफी समय से विपक्ष SIR सहित कई मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगा रहा है। इस बीच संसद में आज विपक्ष (INDIA गठबंधन) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए औपचारिक नोटिस दिया है। भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी सेवारत मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इस तरह का कदम उठाया गया है। नोटिस पर कुल 190 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसद शामिल हैं।
विपक्ष ने CEC पर लगाए 7 गंभीर आरोप
विपक्ष ने CEC पर 7 गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें "कार्यालय में पक्षपाती और भेदभावपूर्ण आचरण", "चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना" और "बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटना" शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अन्य दलों ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया है, जिससे कथित तौर पर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए गए।
हटाने की कानूनी प्रक्रिया
संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत, मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल उसी रीति और आधार पर हटाया जा सकता है जिस तरह सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
नोटिस की मंजूरी
नोटिस मिलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति इसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं। यदि नोटिस स्वीकार हो जाता है, तो आरोपों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई जाती है। यदि समिति दोषी पाती है, तो प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई) से पारित होना अनिवार्य है।




