
- Home
- /
- मुख्य समाचार
- /
- इस बार महाशिवरात्रि पर...
इस बार महाशिवरात्रि पर बन रहे ग्रहों के दुर्लभ संयोग! रात में इस समय जरूर करें ये काम, सारी मनोकामनाएं होंगी पूरी

नई दिल्ली। हर साल फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि का पावन त्योहार मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यही वो दिन था जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। शिव-शक्ति के मिलन की याद में ये पावन त्योहार मनाया जाता है। इस साल महाशिवरात्रि ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ संयोगों वाली है। करीब 300 साल बाद पांच राजयोग और दस शुभ संयोगों का एक साथ निर्माण हो रहा है, जो इसे साधना और संकल्प के लिए अभूतपूर्व बना रहा है।
ग्रहों के दुर्लभ संयोग
ज्योतिष गणना के अनुसार, इस रात आकाश में कई शक्तिशाली योग बन रहे हैं।
पंचग्रही राजयोग: कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र, शनि और राहु की युति से यह महायोग बन रहा है।
शश महापुरुष राजयोग: शनि देव अपनी स्वराशि कुंभ में स्थित होकर इस योग का निर्माण कर रहे हैं।
बुधादित्य व लक्ष्मी नारायण योग: सूर्य-बुध और बुध-शुक्र के मिलन से ये शुभ योग बन रहे हैं।
सर्वार्थ सिद्धि योग: यह कार्यों में सफलता दिलाने वाला विशेष योग भी इस दिन मौजूद रहेगा।
साधना के लिए सबसे शुभ समय समय (15-16 फरवरी की रात)
जानकारी के मुताबिक महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में विभाजित किया जाता है, जिसमें निशिता काल को साधना के लिए सर्वाधिक फलदायी माना गया है।
पूजा का प्रहर
निशिता काल (सबसे खास) रात 12:09 AM से 01:01 AM
प्रथम प्रहर शाम- 06:11 PM से 09:23 PM
द्वितीय प्रहर- रात 09:23 PM से 12:35 AM
तृतीय प्रहर- रात 12:35 AM से 03:47 AM
चतुर्थ प्रहर- भोर 03:47 AM से 06:59 AM
साधना के मुख्य लाभ
मंत्र सिद्धि: इस रात्रि में 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से राहु दोष की शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
ग्रह शांति: दुर्लभ राजयोगों के कारण यह रात मेष, कन्या और कुंभ जैसी राशियों के लिए विशेष धन लाभ और भाग्य उदय करने वाली है।
निशिता काल का महत्व: माना जाता है कि इसी समय शिव 'ज्योतिर्लिंग' के रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए इस समय का ध्यान गहन रूपांतरण लाता है।




