Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य समाचार

एक ऐसा गाना जो आशा जी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, अपना ही गाना सुन हो गईं थीं भावुक...

Aryan
13 April 2026 12:00 PM IST
एक ऐसा गाना जो आशा जी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, अपना ही गाना सुन हो गईं थीं भावुक...
x
आशा भोसले को खुद भी अपनी प्रतिभा के बारे में जानकारी नहीं थी

मुंबई। आशा भोसले एक ऐसी गायिका रहीं जिन्होंने अपनी आवाज से सभी को नृत्य करने पर मजबूर कर दिया। संगीत जगत में अपने अंदाज में गानों को गाकर वो अमर हो गईं। इसलिए आशा भोसले को 'सुरों की मल्लिका' कहा जाता था।

अपनी प्रतिभा का खुद ही उन्हें अंदाजा नहीं था

आशा भोसले का नाम उन गायिकाओं में शुमार था जिन्होंने हर तरह के गीत गाए। 12 हजार गानों को आवाज देकर गिनीज बुक में नाम दर्ज करने वालीं आशा भोसले को खुद भी अपनी प्रतिभा के बारे में जानकारी नहीं थी। एक बार की बात है जब उन्हें एक गाना अलग तरह से गाना था, पहले उन्हें लगा कि वह नहीं कर पाएंगी लेकिन जब उन्होंने अपना ही गाना सुना तो उन्हें यकीन नहीं हुआ कि यह इतना अच्छा हो जाएगा।

पांच दशक पुरानी कहानी है

दरअसल यह कहानी पांच दशक पुरानी है। रेखा की कल्ट मूवी में आशा भोसले ने कई गाने गाए, लेकिन एक गाना उनके लिए बेहद मुश्किल था, क्योंकि उस गाने में उन्हें आशा की तरह नहीं बल्कि फिल्म के कैरेक्टर की तरह गाना था जो उन्होंने पहले कभी नहीं निभाया था।

'इन आखों की मस्ती में' गाने के लिए मांगा वक्त

एक दौर था जब आशा भोसले काफी बिजी हुआ करती थीं। वह एक दिन में तीन-तीन गाने गाया करती थीं। लेकिन जब खय्याम उनके पास गाना लेकर गए तो पहले ही बोल दिया था कि 'इन आखों की मस्ती में' करने के लिए उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि यह थोड़ा मुश्किल गाना है। लेकिन आशा जी तुरंत मान गईं, बस रिहर्सल के कुछ दिनों का समय मांगा।

संगीतकार को उमराव जान की भूमिका चाहिए थी

लेकिन खय्याम ने आशा भोसले से साफ कह दिया था कि उन्हें आशा जी नहीं, बल्कि उमराव जान मतलब रेखा का कैरेक्टर चाहिए। वह हैरान रह गईं, पूछा कैसे? तब खय्याम ने गाकर सुनाया कि उन्हें किस तरह की आवाज चाहिए। फिर आशा जी ने मुस्कुराकर बोला कि फिर इस गाने को पोस्टपोन कर कर दीजिए।

आशा भोसले गा नहीं पा रही थीं

आशा भोसले ने तुरंत कह दिया कि फिर वह अपने बेटे की कसम खाएं कि ऐसा ही होगा। फिर खय्याम ने भी कसम दिलाई कि जैसा उन्हें बताया कि वह 100 प्रतिशत वैसा ही गाना गाएंगी। खय्याम साहब ने आगे बताया था कि जब उन्होंने इसी पहले सुर की आवाज में गाना गाया और फिर अलाप आया। गाना करीब साढ़े पांच मिनट का था। जैसे ही गाना खत्म हुआ और आशा जी ने उसे सुना, उन्होंने आंखें बंद कर ली। एक-दो मिनट तक सन्नाटा पसर गया था। खय्याम साहब ने कहा कि वह अपना गाना सुनकर बेहद भावुक हो गई थीं। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि यह गाना उन्होंने गाया है।

Next Story