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यूजीसी के नए नियम अखिलेश यादव ने दिया बड़ा बयान, कहा-यह नया नियम केंद्र सरकार के ‘गले की फांस’ बना

Shilpi Narayan
28 Jan 2026 4:41 PM IST
यूजीसी के नए नियम अखिलेश यादव ने दिया बड़ा बयान, कहा-यह नया नियम केंद्र सरकार के ‘गले की फांस’ बना
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नई दिल्ली। यूजीसी के नए नियम को लेकर देशभर में विवाद हो रहा है। इस बीच सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोषी बचे नहीं और निर्दोष फंसे नहीं। पिछले कुछ दिनों से यूजीसी के नए कानून को लेकर सियासत गरमाई हुई है। सवर्ण समाज के लोग इस नए कानून का विरोध कर रहे हैं। UGC का नया नियम केंद्र सरकार के ‘गले की फांस’ बन गया है।

BJP धर्म की ठेकेदार बनती है

इस पूरे विवाद पर अखिलेश का यह एक तरह से संतुलित बयान है, जिससे सवर्ण समाज खुश रहे और वोटबैंक को भी आंच न आए। इसके अलावा उन्होंने शंकराचार्य और विकसित भारत जी-राम-जी बिल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अपमान किया गया है। किसने वो तस्वीरे नहीं देखी। उनको स्नान नहीं करने दिया। सरकार ने परंपरा तोड़ी। अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी धर्म की ठेकेदार बनती है।

जी-राम-जी पर बोले अखिलेश

बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के संबोधन पर अखिलेश ने कहा कि विकसित भारत जी-राम-जी पर हमारा सोचना साफ है। उत्तर प्रदेश पहले से ही बजट के लिए दिल्ली की तरफ देख रहा है और अगर आप बजट कम करके देखेंगो तो उत्तर प्रदेश का काम कैसे चलेगा या गरीबों को कैसे काम मिलेगा? दूसरा सवाल, जब ये लोग कह रहे हैं कि हम दुनिया भर में धान, फसलों में या दूध में कहां पहुंच गए हैं लेकिन जो सपना उन्होंने पहले दिन दिखाया था कि किसान की आय दोगुनी होगी, क्या आज किसान की आय दो गुनी हुई? मेट्रो जो बननी थी वो नहीं बनाई जा रही लेकिन पानी पर मेट्रो चलाई जा रही है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में यदि मेट्रो नहीं बन पा रही है तो क्या फायदा आगे बढ़ने का?

सवर्ण समाज के लोगों का आक्रोश चरम पर

इस नए नियम के खिलाफ सवर्ण समाज और सामान्य वर्ग के लोगों का आक्रोश चरम पर है। धीरे-धीरे यह आक्रोश पूरे देश में फैल रहा है। छात्र और संगठन दोनों इसका विरोध कर रहे हैं। हालांकि कल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को आश्वासन दिया कि किसी के साथ गलत नहीं होगा। इसके बावजूद भी असंतोष जारी है। यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। इस नियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कम से कम 20 याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

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