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गैस की किल्लत के बीच रसोई में फिर से आएगा केरोसिन! सरकार ने बनाया नया प्लान...

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी जंग की आंच अब रसोई तक भी पहुंच गई है। इसलिए LPG के संकट के बीच अब ऐसा ईंधन हमारे रसोई में वापसी रहा है जो कि हमारे घरों से लगभग निकल चुका था, मतलब केरोसिन का तेल। दरअसल ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी जंग से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई सुचारू रुप से नहीं होने की वजह से सरकार ने लंबे समय बाद बड़ा फैसला लिया है। जानकारी के मुताबिक, सरकार ने घरेलू इस्तेमाल के लिए केरोसिन का आवंटन बढ़ा दिया है। इसके साथ ही होटलों में कोयला तथा बायोमास जलाने की अस्थायी छूट दी गई है।
दस साल पहले केरोसिन का वितरण बंद हो गया था
एलपीजी की कमी के बीच राज्य सरकार ने लगभग 10 साल बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन दुकानों से जरूरतमंद उपभोक्ताओं को केरोसिन वितरित करने का फैसला किया है। दरअसल केरोसिन का वितरण पूरी तरह बंद कर दिया गया था।
अचानक कम पड़ने लगी गैस
जानकारी के मुताबिक, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, जो अपनी कुल जरूरत का लगभग 88 फीसदी हिस्सा विदेशों से खरीदता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही ठप पड़ गई है। देश की 55 प्रतिशत एलपीजी और 30 प्रतिशत एलएनजी की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।
होटलों को केरोसिन तेल का कोटा मिलेगा
गैस की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने वैकल्पिक ईंधनों का रास्ता अपनाया है। वहीं, आम घरों में खाना पकाने के लिए एलपीजी की कमी न हो इसके लिए केरोसिन को लाया गया है। सरकार ने राज्यों को मिलने वाले एक लाख किलोलीटर के नियमित कोटे के ऊपर 48,000 किलोलीटर मिट्टी का तेल अतिरिक्त रूप से आवंटित किया है।
गैस की जमाखोरी रोकने के लिए बनाए गए नियम
वहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि लोग घबराहट में अतिरिक्त बुकिंग कर रहे हैं। इस जमाखोरी को रोकने और समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक सख्त कदम उठाया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी वाले सिलेंडर की अगली बुकिंग के लिए न्यूनतम अवधि 21 दिन से बढ़ाकर सीधे 45 दिन कर दी गई है। हालांकि, शहरी क्षेत्रों के लिए यह सीमा 25 दिन ही रखी गई है।




