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तिरुमला मंदिर में प्रसादम लड्डू मामले में सुप्रीम कोर्ट से बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को झटका! जानें कोर्ट ने क्या कहा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति के तिरुमला मंदिर में प्रसादम लड्डू बनाने में इस्तेमाल घी में कथित मिलावट मामले से जुड़ी याचिका पर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी को झटका दिया है। सुब्रमण्यम स्वामी ने आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा एसआईटी रिपोर्ट की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति गठित करने के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दी है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से गठित एक सदस्यीय समिति की प्रशासनिक जांच आपराधिक कार्यवाही से ओवरलैप नहीं करेगी।
किसी तरह का टकराव या हितों का टकराव नहीं
बता दें कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिका को पर्याप्त आधार के अभाव में खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार की ओर से गठित एक सदस्यीय समिति की प्रशासनिक जांच आपराधिक कार्यवाही से ओवरलैप नहीं करेगी। दोनों की जांच का दायरा स्पष्ट रूप से अलग-अलग निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रशासनिक जांच और चार्जशीट से संबंधित आपराधिक प्रक्रिया में किसी तरह का टकराव या हितों का टकराव नहीं है। ऐसे में दोनों प्रक्रियाएं कानून के अनुसार समानांतर रूप से चल सकती हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच और पूछताछ के दायरे को स्पष्ट रूप से तय किया गया है, इसलिए कार्यवाही के ओवरलैप होने की आशंका नहीं बनती।
फंड का गलत इस्तेमाल किया गया
बता दें कि एसआईटी की जांच में सामने आया है कि भगवान वेंकटेश्वर मंदिर को घी बताकर जो सामान बेचा गया, वह असल में केमिकल से प्रोसेस किया हुआ पामोलिन तेल और अन्य चीजें थीं। अब ईडी यह पता लगाएगी कि आरोपियों ने मिलावटी घी बेचकर पैसे कैसे कमाया। एजेंसी को शक है कि इसमें हवाला के जरिए पैसों का लेन-देन हुआ है और फंड का गलत इस्तेमाल किया गया है।
क्या है मामला?
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब सितंबर 2024 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि राज्य में पिछली वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार के समय तिरुपति लड्डू (पवित्र मिठाई) बनाने में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल हुआ था। इससे बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।




