Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य समाचार

ब्रह्मा जी के पांच सिर थे, जानें इनमें से एक सिर को भगवान शिव ने क्यों काटा था?

Anjali Tyagi
8 April 2026 7:00 AM IST
ब्रह्मा जी के पांच सिर थे, जानें इनमें से एक सिर को भगवान शिव ने क्यों काटा था?
x

नई दिल्ली। पौराणिक कथाओं और शास्त्रों में ब्रह्मा जी के चारों सिर का जिक्र मिलता है। हालांकि उनके चार नहीं पांच सिर थे। ब्रह्मा जी के चार मुखों का गहरा आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक महत्व है। साथ ही सवाल उठता है कि उनके चार सिर ही क्यों थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने ब्रह्मा जी का पांचवां सिर उनके अहंकार को नष्ट करने और उनके द्वारा बोले गए असत्य (झूठ) के कारण काटा था।

दो प्रसिद्ध कथाएं प्रचलित हैं

1. शिवलिंग का आदि और अंत

जब ब्रह्मा जी और विष्णु जी में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ, तब शिव जी एक विशाल ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए। ब्रह्मा जी ने उसका अंत ढूंढने का दावा करते हुए झूठ बोला कि उन्होंने शीर्ष देख लिया है, और केतकी के फूल को झूठा साक्षी बनाया। इस छल से क्रोधित होकर शिव जी ने अपने 'काल भैरव' रूप में ब्रह्मा जी का वह मुख काट दिया जिससे उन्होंने झूठ बोला था।

2. अहंकार और अनुचित व्यवहार

कुछ पुराणों के अनुसार, ब्रह्मा जी अपनी ही रचना (पुत्री के समान सतरूपा/सरस्वती) के प्रति आकर्षित होकर अपनी मर्यादा भूल गए थे। जब सतरूपा उनकी दृष्टि से बचने के लिए ऊपर की ओर आकाश में गई, तो ब्रह्मा जी ने उसे देखने के लिए अपना पांचवा सिर विकसित कर लिया। इस अधर्म को रोकने के लिए महादेव ने उनका वह सिर काट दिया। भगवान शिव ने ब्रह्मा जी को यह दंड भी दिया कि त्रिदेवों में होने के बावजूद धरती पर उनकी पूजा नहीं की जाएगी।

क्यों होते हैं चार सिर

वास्तव में पौराणिक कथाओं और शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा जी के चार मुखों का गहरा आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक महत्व है।

- ब्रह्मा जी के चारों मुख चारों वेदों- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का प्रतिनिधित्व करते हैं।

- वे चारों दिशाओं में देखते हैं, जो उनकी सर्वव्यापकता और पूरे ब्रह्मांड के निर्माण व देखरेख की शक्ति को दर्शाता है।

- उनके सिर मानवीय चेतना की विभिन्न अवस्थाओं जैसे जाग्रत, स्वप्न, और गहरी नींद (सुषुप्ति) के भी प्रतीक माने जाते हैं।


Next Story