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फौरन निपटा लें सारे काम...एक फरवरी से बदलने वाले हैं ये नियम, जानें कौन-कौन

नई दिल्ली। नए माह की शुरुआत होते ही आम लोगों के रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई खास नियम बदलने जा रहे हैं। दरअसल 1 फरवरी से फास्टैग, जमीन की रजिस्ट्री, बैंकिंग और वेरिफिकेशन से जुड़ी व्यवस्था में बड़े बदलाव होने वाले हैं। इसका सीधा असर वाहन चालकों और प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोगों पर पड़ेगा। लेकिन यदि इन नियमों को समय रहते नहीं समझा गया, तो आगे चलकर परेशानी उठानी पड़ सकती है। इसलिए नियम के मुताबिक 1 फरवरी से क्या बदलने जा रहा है, उस हिसाब से काम को निपटाना आवश्यक है।
फास्टैग यूजर्स को दी गई राहत
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने फास्टैग से जुड़ी Know Your Vehicle प्रक्रिया को पूरी तरह से समाप्त करने का फैसला लिया है। 1 फरवरी से फास्टैग एक्टिव होने के बाद किसी भी तरह का केवाईसी वेरिफिकेशन नहीं किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, अब यह पूरी जिम्मेदारी बैंकों की होगी कि वे टैग जारी करने से पहले ही वाहन से जुड़ी सभी जांच प्रक्रिया पूरी कर लें।
टैग में गड़बड़ी होने पर ही दोबारा जांच की जाएगी
जिन वाहनों में पहले से फास्टैग लगा हुआ है, उन्हें अब किसी तरह की रूटीन केवाईसी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। जब तक टैग के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं होती, तब तक यूजर को किसी भी तरह का वेरिफिकेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ इस्तेमाल, टैग ढीला होने या किसी गड़बड़ी की शिकायत आने पर ही दोबारा जांच की जाएगी।
वाहन का डाटा पहले वाहन डेटाबेस से मिलाया जाएगा
नए नियमों के तहत बैंक अब फास्टैग एक्टिव करने से पहले वाहन की पूरी जांच करेंगे। वाहन का डाटा पहले वाहन डेटाबेस से मिलाया जाएगा। यदि वहां जानकारी उपलब्ध नहीं हुई तो रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के आधार पर वेरिफिकेशन किया जाएगा। वहीं ऑनलाइन फास्टैग खरीदने वालों पर भी यही नियम लागू होगा, जिससे बाद में यूजर्स को परेशान न होना पड़े। अब तक केवाईसी प्रक्रिया की वजह से हाईवे पर लोगों को बार-बार वेरिफिकेशन, डॉक्यूमेंट्स अपलोड और टोल प्लाजा पर देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। नए नियम से फास्टैग सिस्टम अधिक टेक्नोलॉजी आधारित और सुचारू हो जाएगा, जिससे टोल पर समय की बचत होगी।
जमीन की रजिस्ट्री में भी बड़ा बदलाव
1 फरवरी से जमीन और प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त में आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है. अब रजिस्ट्री के समय केवल खरीदार और विक्रेता ही नहीं, बल्कि गवाहों का भी आधार वेरिफिकेशन मौके पर ही किया जाएगा। वहीं सभी उप निबंधक कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीनें लगा दी गई है, जिन्हें UIDAI के सर्वर से जोड़ा गया है। जैसे ही पक्षकार अंगूठा लगाएंगे, पहचान की तुरंत पुष्टि होगी। पहचान सही होने पर ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वहीं फर्जी आधार कार्ड के जरिए जमीन बेचने जैसी घटनाओं पर इससे रोक लगेगी।
वाहन चालकों को लगातार वेरिफिकेशन कराने से मिलेगी मुक्ति
यदि किसी बुजुर्ग व्यक्ति के फिंगरप्रिंट मैच नहीं होते, तो उनके लिए फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। आश्यकताड़ने पर आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी के जरिए भी वेरिफिकेशन किया जा सकेगा। इन बदलावों से बेनामी संपत्तियों की रजिस्ट्री पर लगाम लगेगी, फर्जी गवाहों की पहचान दर्ज होगी और भविष्य में कानूनी विवादों की संभावना कम होगी। वहीं फास्टैग नियमों में बदलाव से वाहन चालकों को लगातार वेरिफिकेशन कराने से मुक्ति मिलेगी।




