
- Home
- /
- मुख्य समाचार
- /
- ब्रह्मा जी ने क्या सच...
ब्रह्मा जी ने क्या सच में अपनी बेटी से की थी शादी, जानें क्या है इसका सच

नई दिल्ली। हिंदू पुराणों में कई देवी-देवताओं की उत्पत्ति, प्रेम, विवाह की प्रचलित कहानियां मिलती हैं। जिनमें से एक प्रचलित कहानी है ब्रह्मा जी और मां सरस्वती के बीच वैवाहिक संबंध। हमेशा सवाल उठाया जाता है कि आखिर ब्रह्मा जी ने अपनी ही बेटी से शादी क्यों की थी। हिंदू पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी और मां सरस्वती के बीच रचयिता और रचना के संबंध को अक्सर 'पुत्री' और 'पत्नी' के रूप में वर्णित किया गया है, लेकिन इसे साधारण मानवीय रिश्तों की तरह नहीं देखना चाहिए। यह एक गहरा आध्यात्मिक प्रतीक है।
सरस्वती पुराण और मत्स्य पुराण
इन ग्रंथों के अनुसार, ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के लिए अपने ही अंश या 'तेज' से माता सरस्वती (जिन्हें शतरूपा या सावित्री भी कहा गया है) को उत्पन्न किया। चूंकि उनकी उत्पत्ति ब्रह्मा जी से हुई थी, इसलिए वे उनकी पुत्री कहलाईं। सृष्टि को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने सरस्वती के साथ मिलकर प्रथम मानव 'मनु' को जन्म दिया। इसलिए संक्षेप में, यह प्रसंग 'सृष्टि' और 'ज्ञान' के अटूट मिलन का एक अलंकारिक वर्णन है, न कि कोई सांसारिक विवाह है।
प्रतीकात्मक अर्थ
आध्यात्मिक दृष्टि से ब्रह्मा को 'चेतना' और सरस्वती को 'ज्ञान व शक्ति' का प्रतीक माना जाता है। किसी भी रचना (सृष्टि) के लिए रचयिता का अपनी शक्ति या ज्ञान से जुड़ना अनिवार्य होता है। इसे ही कथाओं में 'विवाह' के रूप में मानवीकरण किया गया है।
पांचवें सिर की कथा
मत्स्य पुराण के अनुसार, सरस्वती ब्रह्मा जी की दृष्टि से बचने के लिए चारों दिशाओं और आकाश में छिपने लगीं। उन्हें देखने के लिए ब्रह्मा जी के चार और फिर एक पांचवां सिर प्रकट हुआ। अंततः ब्रह्मा जी ने उन्हें सृष्टि के विस्तार में सहयोग करने के लिए मनाया।
पूजा न होने का कारण
कई मान्यताओं के अनुसार, अपने ही अंश के प्रति आकर्षित होने के कारण महादेव (शिव) ने ब्रह्मा जी को दंडित किया और उनका पांचवां सिर काट दिया। उन्होंने ब्रह्मा जी को यह श्राप भी दिया कि पृथ्वी पर उनकी पूजा नहीं की जाएगी (पुष्कर के मंदिर को छोड़कर)।




