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वैशाख माह के हर सोमवार को जरूर करें शिव की पूजा, वैवाहिक जीवन में मिलता है लाभ

वैशाख माह में भीषण गर्मी के कारण भगवान शिव को शीतलता प्रदान करने के लिए विशेष रूप से पूजा और शिवलिंग पर जल (गलंतिका) अर्पित किया जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार, इस पवित्र महीने में महादेव की पूजा करने से मानसिक तनाव दूर होता है, पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
वैशाख में शिव पूजा के प्रमुख कारण और महत्व:
शीतलता और गलंतिका: वैशाख और ज्येष्ठ की तेज गर्मी में शिवजी के शरीर के तापमान को सामान्य रखने के लिए शिवलिंग के ऊपर मटकी (गलंतिका) से लगातार जलधारा का विधान है।
समुद्र मंथन की कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को पीने के बाद शिवजी का कंठ गर्म हो गया था, जिसे शीतल करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था।
विशेष पुण्य काल: वैशाख माह को विष्णु और शिव की पूजा के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है। इस दौरान की गई पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है।
सोमवार का विशेष महत्व: वैशाख के सोमवार को शिवलिंग पर जल और केसर मिलाकर चढ़ाने से वैवाहिक परेशानियां दूर होती हैं और भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं।
मानसिक शांति: इस माह में सच्चे मन से पूजा और रात्रि जागरण करने से तनाव कम होता है और नकारात्मकता दूर होती है।
वैशाख व ज्येष्ठ माह में बहुत अधिक गर्मी पड़ती है। ऐसे में शिवलिंग पर गलंतिका बांधें जाने का एक कारण यह भी है कि इससे शिवलिंग के ऊपर लगातार शीतल जलधारा बनी रहती है।
सोमवार को जरूर करें पूजा
कहते हैं कि विवाह परेशानियों (Marriage Problems) से छुटकारा पाने के लिए वैशाख माह के सोमवार को जल में केसर मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए।
वैशाख महीने की परंपराएं:
वैशाख भगवान विष्णु, शिव और पितरों को पूजने का पवित्र माह है। वैशाख महीना 5 मई तक रहेगा। हिंदू कैलेंडर के इस दूसरे महीने को ब्रह्माजी ने सभी महीनों में सबसे अच्छा और बहुत खास माना है। इस महीने में भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा के लिए खास है।
वैशाख में गर्मी काफी अधिक रहती है, इसलिए इस माह में पूजा-पाठ के साथ ही जूते-चप्पल, पानी और छाते का दान करना चाहिए।




