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दुनिया में आने के बाद बच्चा पहले सांस लेता है या रोता है? जानिए क्या कहता है वैज्ञानिक दृष्टिकोण

नई दिल्ली। नवजात शिशु का पहला रोना हर माता-पिता के लिए खुशी का पल होता है। लेकिन कभी सोचा है कि दुनिया मेंआने के बाद बच्चा पहले रोता है या सांस लेता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो बच्चा पैदा होने के बाद सबसे पहले सांस लेता है, और उसी सांस के बाहर निकलने की प्रक्रिया से रोना उत्पन्न होता है। यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही सेकंडों में होती है।
फेफड़ों का सक्रिय होना
गर्भ के अंदर बच्चे के फेफड़े तरल पदार्थ से भरे होते हैं और वे सांस लेने का काम नहीं करते। ऑक्सीजन उसे मां की गर्भनाल (Placenta) से मिलती है।
पहली सांस
जन्म के तुरंत बाद जब बच्चा बाहरी वातावरण के संपर्क में आता है, तो तापमान में बदलाव और शरीर पर पड़ने वाले दबाव के कारण उसका मस्तिष्क उसे सांस लेने का संकेत देता है। यह पहली सांस एक गहरे 'हाफने' की तरह होती है जिससे हवा तेजी से फेफड़ों में जाती है।
रोने की शुरुआत
जब यह हवा फेफड़ों से बाहर निकलती है, तो वह बच्चे के वोकल कॉर्ड्स से टकराती है, जिससे रोने की आवाज़ पैदा होती है। इसलिए, रोना असल में पहली सांस लेने का ही एक परिणाम है।
जन्म के समय रोना क्यों जरूरी है?
रोने के दौरान बच्चा गहरी सांसें लेता है, जिससे फेफड़ों में जमा तरल पदार्थ बाहर निकल जाता है और फेफड़े पूरी तरह खुल जाते हैं। रोने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से बढ़ता है और हृदय की कार्यप्रणाली व्यवस्थित होती है। डॉक्टर Apgar Score के माध्यम से बच्चे की सेहत का आकलन करते हैं, जिसमें एक मजबूत रोना इस बात का प्रमाण है कि बच्चा स्वस्थ है और उसका श्वसन तंत्र (Respiratory system) सही काम कर रहा है। यदि बच्चा जन्म के तुरंत बाद खुद नहीं रोता, तो डॉक्टर उसे सहलाकर या पीठ थपथपाकर उत्तेजित करते हैं ताकि वह सांस लेना और रोना शुरू कर सके।




