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एलोरा का कैलाश मंदिर: स्थापत्य कला का अद्भुत चमत्कार, जानें इतिहास

महाराष्ट्र के औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) जिले में स्थित कैलाश मंदिर भारतीय वास्तुकला का सबसे बेमिसाल उदाहरण है। यह मंदिर एलोरा की गुफा संख्या 16 में स्थित है।
निर्माण और इतिहास
इस भव्य मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में राष्ट्रकूट वंश के राजा कृष्ण प्रथम ने करवाया था। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसे ऊपर से नीचे की ओर (Top-down) काटकर बनाया गया है।
मुख्य विशेषताएं
एकल पत्थर की संरचना: यह पूरी तरह से एक विशाल पहाड़ की चट्टान को काटकर बनाया गया है। इसे बनाने में करीब 4 लाख टन पत्थर निकाले गए थे।
अद्वितीय तकनीक: आधुनिक इंजीनियरों का मानना है कि आज की तकनीक से भी ऐसा मंदिर बनाना लगभग असंभव है। इसे तराशने में छेनी और हथौड़ी का उपयोग हुआ था।
वास्तुकला: यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसकी संरचना हिमालय के कैलाश पर्वत की याद दिलाती है। इसमें विस्तृत नक्काशी, हाथी और हिंदू महाकाव्यों (रामायण और महाभारत) के दृश्य अंकित हैं।
आकार: यह मंदिर 142 फीट लंबा, 154 फीट चौड़ा और 90 फीट ऊंचा है।
एक अनसुलझा रहस्य
इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर को बनाने में केवल 18 साल का समय लगा। इतने कम समय में इतनी बारीकी से विशाल पहाड़ को तराशना आज भी एक रहस्य बना हुआ है। मुग़ल शासक औरंगजेब ने इसे तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वह इसमें असफल रहा।




