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भीषण गर्मी और बारिश ने 2025 में दर्शाया जलवायु परिवर्तन का गंभीर प्रभाव! समुद्र के स्तर में वृद्धि का बढ़ा खतरा,जानें नासा की चेतावनी

नई दिल्ली। साल 2025 ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और यह अब तक का सबसे गर्म साल दर्ज किया गया है। 2025 धरती का रिकॉर्ड-तोड़ गर्म साल बना क्योंकि मानव-प्रेरित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (जीवाश्म ईंधन जलाने से) और प्राकृतिक जलवायु पैटर्न (जैसे अल नीनो का प्रभाव खत्म होने के बाद भी) का लगातार प्रभाव रहा। जिससे भीषण गर्मी, रिकॉर्ड-तोड़ महासागर गर्मी, और विनाशकारी तूफान व बाढ़ जैसी चरम मौसम की घटनाएं हुईं, जो जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों को दर्शाती हैं।
रिकॉर्ड तोड़ तापमान: साल 2025 में वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5°C की सीमा को बार-बार पार कर गया।
भीषण लू (Heatwaves): भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में झुलसाने वाली गर्मी पड़ी, जहां तापमान 50°C के करीब पहुंच गया।
मूसलाधार बारिश और बाढ़: गर्म हवा अधिक नमी सोखती है, जिसके कारण मानसून के दौरान कई देशों में अत्यधिक भारी और विनाशकारी बारिश (Flash Floods) देखी गई।
ग्लेशियरों का पिघलना: अत्यधिक गर्मी के कारण आर्कटिक और अंटार्कटिक में बर्फ पिघलने की गति तेज हुई, जिससे समुद्र के स्तर में वृद्धि का खतरा बढ़ गया है।
नासा की चेतावनी
जानकारी के मुताबिक नासा (NASA) और कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस जैसी संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उत्सर्जन कम नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसे रिकॉर्ड सामान्य हो जाएंगे।




