
- Home
- /
- मुख्य समाचार
- /
- 65 साल की उम्र में...
65 साल की उम्र में निकाह, पत्नी ने बनवाया पूर्व सांसद का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, ऐसे हुआ पूरा खुलासा

अलीगढ़ में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पूर्व राज्यसभा सांसद स्वर्गीय वसीम अहमद की पत्नी और साले पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत पूर्व सांसद के भांजे सैय्यद अशहर इस्लाम (राजा) ने दी, जिसमें इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। यह मामला अब उत्तर प्रदेश की राजनीति और कानूनी सिस्टम में सनसनी का विषय बना हुआ है।
घटना की शुरुआत 26 अप्रैल 2021 को हुई, जब कोरोना काल के दौरान पूर्व सांसद वसीम अहमद का हृदयाघात से निधन उनके छोटे भाई के आवास पर हो गया था। हालांकि, मौत के बाद जो विवाद खड़ा हुआ उसने पूरे परिवार को कानूनी लड़ाई में धकेल दिया। अशहर ने अपनी तहरीर में बताया कि वसीम अहमद ने जून 2014 में दिल्ली के शाहीनबाग निवासी फराह बानो से 65 वर्ष की आयु में निकाह किया था। हालांकि उम्र अधिक होने के कारण वसीम ने अपनी किसी भी सरकारी या निजी दस्तावेज में पत्नी का नाम दर्ज नहीं कराया था, जिससे दोनों के बीच रिश्तों में तनाव पैदा हुआ।
फराह बानो कथित तौर पर अपने पति वसीम पर सऊदी अरब में रहने का दबाव बना रही थीं। वसीम कुछ समय तक जेद्दा में रुके भी, लेकिन बाद में वापस भारत लौट आए। चूंकि फराह के पास निकाहनामा, पासपोर्ट और आधार कार्ड के अलावा कोई कानूनी सबूत नहीं था, इसलिए उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने भाई मुस्तजाब मलिक के साथ मिलकर जुलाई 2021 में जिला अस्पताल मलखान सिंह के नाम से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। इस दस्तावेज़ में मृत्यु स्थल को घर के बजाय जिला अस्पताल बताया गया, जबकि वास्तविक मौत घर पर हुई थी।
जब यह बात परिवार को पता चली तो सैय्यद अशहर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से शिकायत की। जांच में पता चला कि यह मृत्यु प्रमाण पत्र अस्पताल से जारी ही नहीं हुआ था। इसके बाद वसीम के छोटे भाई नसीम अख्तर ने नवंबर 2022 में नगर निगम अलीगढ़ से सही दस्तावेजों के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया। मामले ने तब और तूल पकड़ा जब पता चला कि फराह और मुस्तजाब ने नसीम की पूरी फाइल नगर निगम से फर्जी तरीके से निकलवाकर अपने नाम से दूसरा मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। इतना ही नहीं, नगर निगम के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से नसीम द्वारा प्राप्त वैध मृत्यु प्रमाण पत्र को बिना सूचना के निरस्त भी कर दिया गया।
जब मामला मुख्यमंत्री स्तर पर पहुंचा, तो जांच के बाद पूरा सच सामने आया। पुलिस ने फराह बानो, मुस्तजाब मलिक और नगर निगम से जुड़े संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इंस्पेक्टर सिविल लाइन विनोद कुमार के अनुसार, पुलिस अब सभी दस्तावेजों, फाइलों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
यह प्रकरण न केवल कानूनी प्रक्रियाओं की कमजोरी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि दस्तावेजी हेरफेर किस तरह परिवारों और सरकारी सिस्टम को गहरे संकट में डाल सकता है। अब देखना यह है कि पुलिस जांच आगे किस दिशा में जाती है और इस विवाद का अंतिम परिणाम क्या होता है।




