Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य समाचार

क्रिटिकल मिनरल्स सम्मेलन की बैठक में भाग लेने अगले हफ्ते विदेश मंत्री एस.जयशंकर जाएंगे US, जानें किन मुद्दों पर होगी चर्चा...

Aryan
29 Jan 2026 12:28 PM IST
क्रिटिकल मिनरल्स सम्मेलन की बैठक में भाग लेने अगले हफ्ते विदेश मंत्री एस.जयशंकर जाएंगे US, जानें किन मुद्दों पर होगी चर्चा...
x
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की मेजबानी में होने वाली यह पहली हाई लेवल मीटिंग होगी।

नई दिल्ली। अमेरिका में होने वाली क्रिटिकल मिनरल्स सम्मेलन की बैठक में शामिल होने के लिए विदेश मंत्री एस.जयशंकर अगले हफ्ते यूएस जा सकते हैं। यह बैठक अहम खनिजों से जुड़े मुद्दे को लेकर की जाएगी। बता दें कि यह बैठक वॉशिंगटन के डीसी में आयोजित होगी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की मेजबानी में होने वाली यह पहली हाई लेवल मीटिंग होगी। जानकारी के मुताबिक, बैठक से अलग एस जयशंकर और मार्को रूबियो कई अहम मुद्दों पर भी बातचीत हो सकती है।

कई देशों को एक मंच पर लाने के है मकसद

दरअसल क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल की बैठक दुनियाभर के कई देशों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, ताकि अहम खनिजों की सप्लाई चेन सुरक्षित करने के लिए सहयोग बढ़ाया जा सके। इनमें लिथियम, कोबाल्ट, निकल जैसे आवश्यक मटीरियल भी शामिल हैं, जो इलेक्ट्रिक गाड़ियों और रिन्यूवल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर डिफेंस सिस्टम्स तक की बुनियाद हैं।

भारत- अमेरिका के बीच बढ़ा तनाव

यह हाई लेवल मीटिंग ऐसे वक्त में होने जा रही है, जब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर तना-तनी चल रही है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि यदि जयशंकर अमेरिका जाते है तो दोनों देशों के रिश्तों में आई तल्खी को कम करने की कोशिश हो सकती है। इसके साथ ही पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मीटिंग की संभावनाओं पर भी बात हो सकती है। गौरतलब है कि एस जयशंकर यदि अमेरिका जाते हैं तो इसका मतलब होगा कि दोनों देशों के बीच मनमुटाव खत्म हो गया है।

भारतीय कंपनियों की खास बाजारों में पहुंच बढ़ेगी

विदेश मंत्री एस जयशंकर का अमेरिका दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत ने हाल में ही यूरोपियन यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) किया है। यह समझौता अमेरिकी दबाव के बीच खास माना जा रहा है। बता दें कि इस समझौते से भारतीय कंपनियों की खास बाजारों में पहुंच बढ़ेगी। इससे 'मेड इन इंडिया' मेडिकल उपकरणों पर टैरिफ में कमी आएगी।

Next Story