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अंतिम पड़ाव की तरफ हरीश राणा, जाते-जाते 5 लोगों को दे जाएंगे नई जिंदगी ! पड़ोसी ने बताई पिता की वह बात

गाजियाबाद। गाजियाबाद के हरीश राणा (32) को सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की मंजूरी मिल गई है। इस फैसले से हर किसी की आंखें नम हो गई। यह यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की तरफ है। ऐसे में उनका परिवार उनके अंगों को दान कर 5 अन्य लोगों को नई जिंदगी देने जा रहा है। 13 साल तक कोमा में रहने के बाद, हरीश को 15 मार्च 2026 को दिल्ली एम्स (AIIMS) के लिए विदा किया गया, जहां उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पिता का संकल्प और त्याग
पड़ोसियों ने बताया कि पिता अशोक राणा ने पिछले 13 वर्षों से अपने बेटे की सेवा में दिन-रात एक कर दिया था। उन्होंने बेटे के इलाज के लिए अपनी पुखों की जमीन और तीन मंजिला मकान तक बेच दिया, लेकिन कभी हार नहीं मानी।
ब्रह्माकुमारी बहनों की अंतिम प्रार्थना
हाल ही में एक वीडियो भी सामने आया है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया. इस वीडियो में ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ी कुछ बहनें राणा परिवार के घर पहुंचती दिखाई देती हैं। वे हरीश के माथे पर चंदन का तिलक लगाती हैं और उनके लिए प्रार्थना करती हैं। घर से विदा करते समय पिता ने भावुक होकर हरीश से कहा, "सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब विदा हो जाओ"। बताया जाता है कि कि राणा परिवार लंबे समय से इस आध्यात्मिक संस्था से जुड़ा हुआ है।
अंगदान का निर्णय
पिता ने ही यह इच्छा जताई कि उनके बेटे के अंग किसी और के काम आ सकें। उनके इस निर्णय को समाज के लिए एक प्रेरक कदम बताया जा रहा है।
पड़ोसी भी बनें गवाह
राजनगर एक्सटेंशन की जिस सोसाइटी में वे रहते हैं, वहां के पड़ोसियों ने बताया कि पिता ने 13 साल तक हरीश की सांसों की हर हलचल में उम्मीद ढूंढी, और आज उनका यह फैसला पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है। कई बार लोग कहते थे कि इतनी लंबी लड़ाई कोई कैसे लड़ सकता है, लेकिन राणा परिवार ने कभी हार नहीं मानी। उनके मुताबिक इस सेवा भावना ने पूरे इलाके में लोगो के दिलों में परिवार के लिए सम्मान पैदा कर दिया।




