Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य समाचार

कभी सोचा है कि त्रिदेवों में सबसे पहले कौन आया था? कौन है सबसे श्रेष्ठ देव...

Anjali Tyagi
3 April 2026 7:00 AM IST
कभी सोचा है कि त्रिदेवों में सबसे पहले कौन आया था? कौन है सबसे श्रेष्ठ देव...
x

नई दिल्ली। हमारे दिमाग में हमेशा ही एक सवाल उठता है कि त्रिदेवों में कौन सबसे पहले आया था। साथ ही कौन सबसे श्रेष्ठ है। बता दें कि हिंदू धर्मग्रंथों में त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) की उत्पत्ति और श्रेष्ठता के बारे में अलग-अलग पुराणों में अलग-अलग मत दिए गए हैं, जो मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करते हैं कि आप किस पुराण या संप्रदाय को आधार मानते हैं।

सबसे पहले कौन आया?

शिव पुराण के अनुसार: सृष्टि के निर्माण से पहले केवल सदाशिव (निराकार परब्रह्म) का अस्तित्व था। उन्होंने ही अपनी शक्ति से विष्णु और ब्रह्मा को प्रकट किया। इस मत के अनुसार, शिव (सदाशिव) सबसे पहले आए।

विष्णु पुराण के अनुसार: भगवान विष्णु ही परम सत्य हैं। उनके अनुसार, विष्णु ने ही ब्रह्मा को अपनी नाभि से निकले कमल से उत्पन्न किया और शिव को अपने ललाट (माथे) से प्रकट किया।

ब्रह्मा जी के अनुसार: कुछ कथाओं में ब्रह्मा जी को "स्वयंभू" (स्वयं उत्पन्न) कहा गया है, जिन्होंने सृष्टि की रचना के लिए विष्णु और शिव को प्रकट किया।

सबसे बड़ा कौन है?

श्रेष्ठता का प्रश्न भी अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा जाता है।

भृगु ऋषि की परीक्षा: एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा के अनुसार, जब महर्षि भृगु ने तीनों देवों की परीक्षा ली, तो भगवान विष्णु को उनकी क्षमाशीलता और धैर्य के कारण सबसे बड़ा और श्रेष्ठ माना गया।

शिव की सर्वोच्चता: शैव मत के अनुसार, भगवान शिव (महादेव) ही सर्वोच्च हैं क्योंकि वे अजन्मे और स्वयंभू हैं। शिव पुराण की कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता का विवाद हुआ, तब शिव एक विशाल ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए, जिसका आदि या अंत दोनों में से कोई भी नहीं खोज पाया, जिससे उनकी सर्वोच्चता सिद्ध हुई।

दार्शनिक दृष्टिकोण: वेदों और उपनिषदों के अनुसार, ये तीनों एक ही परम सत्ता (ब्रह्म) के तीन अलग-अलग रूप हैं। ब्रह्मा सृजन (Rajas), विष्णु पालन (Sattva) और महेश विनाश (Tamas) के प्रतीक हैं। इसलिए, इनमें से कोई छोटा या बड़ा नहीं है; ये तीनों एक-दूसरे के पूरक और अविभाज्य हैं।

Next Story