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कभी सोचा है कि आखिर कुंभकर्ण क्यों सोता था 6 महीने? जानें इंद्रासन के बदले निद्रासन वरदान का सच

नई दिल्ली। रामायण में कई कहानियां और किस्से प्रचलित है। रामायण के पात्र कुंभकर्ण के 6 महीने सोने और भारी मात्रा में भोजन करने पर कई सवाल उठते है। बता दें कि रामायण के अनुसार, कुंभकर्ण के 6 महीने सोने और भारी मात्रा में भोजन करने के पीछे मुख्य कारण ब्रह्मा जी का एक वरदान (जो अनजाने में श्राप बन गया) था।
इंद्रासन के बदले निद्रासन
कुंभकर्ण, रावण और विभीषण ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की थी। जब ब्रह्मा जी वरदान देने आए, तो इंद्र देव भयभीत हो गए कि कहीं कुंभकर्ण उनका स्वर्ग का सिंहासन (इंद्रासन) न मांग ले।
सरस्वती जी की माया
इंद्र के अनुरोध पर, देवी सरस्वती कुंभकर्ण की जिह्वा (जीभ) पर बैठ गईं। इस कारण जब कुंभकर्ण 'इंद्रासन' मांगना चाहता था, तो उसके मुख से 'निद्रासन' (सोने का आसन) निकल गया। ब्रह्मा जी ने 'तथास्तु' कह दिया और उसे हमेशा सोते रहने का वरदान मिल गया।
वरदान में संशोधन
जब रावण को पता चला कि उसके भाई को इतना बड़ा श्राप मिल गया है, तो उसने ब्रह्मा जी से इसे कम करने की प्रार्थना की। तब ब्रह्मा जी ने इसमें सुधार करते हुए कहा कि वह 6 महीने सोएगा और केवल एक दिन के लिए जागेगा।
विशाल आहार
कुंभकर्ण का शरीर अत्यंत विशाल था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वह उस एक दिन जब जागता था, तो अगले 6 महीनों के लिए अपनी भूख मिटाने के लिए पहाड़ जैसा भोजन और मदिरा का सेवन करता था। ब्रह्मा जी ने भी यह सोचा था कि यदि कुंभकर्ण रोज जागकर भोजन करेगा, तो पूरे संसार का अन्न समाप्त हो जाएगा, इसलिए उसका अधिक समय तक सोना सृष्टि के हित में था।




