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कभी सोचा है कि यमराज को ही क्यों मृत्यु का काम सौंपा गया? जानें इसके पीछे की कहानी

नई दिल्ली। यमराज को मृत्यु का कार्यभार सौंपा गया है। हमारे दिमाग में मृत्यु का नाम आते ही यमराज का भयानक रूप सामने आता है। यमराज को मृत्यु का देवता कहा जाता है। लेकिन कभी लोचा है कि आखिर यमराज को ही क्यों प्राण सेने का काम सौंपा गया, किसी और को क्यों नहीं।
इसके पीछे का कारण
प्रथम मृत पुरुष (वैदिक परंपरा)
वेदों में यमराज को "प्रथम मृत" माना गया है। वे पहले ऐसे मनुष्य थे जिन्होंने मृत्यु का मार्ग देखा और परलोक पहुंचे। चूंकि वे परलोक के मार्ग को खोजने वाले पहले व्यक्ति थे, इसलिए उन्हें वहां का शासक और मृत आत्माओं का मार्गदर्शक नियुक्त किया गया।
पिता का शाप (पौराणिक कथा)
एक अन्य कथा के अनुसार, यमराज भगवान सूर्य और संज्ञा के पुत्र हैं। माना जाता है कि सूर्य देव ने अपनी पत्नी संज्ञा (या उनकी छाया) के प्रति यम के व्यवहार या माता के क्रोधवश यम को शाप दिया था, जिसके कारण उन्हें प्राणियों का संहार करने वाला और मृत्यु का देवता बनना पड़ा।
धर्मराज का पद
यमराज को केवल मृत्यु ही नहीं, बल्कि 'धर्म' और 'न्याय' का देवता भी माना जाता है। उनका मुख्य कार्य प्राणियों के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब रखकर उन्हें न्याय देना है, ताकि संसार का संतुलन बना रहे। पौराणिक ग्रंथों जैसे गरुड़ पुराण में उनके कार्यों का विस्तार से वर्णन मिलता है, जहां वे मनुष्यों के कर्मों के आधार पर उन्हें स्वर्ग या नरक भेजने का निर्णय लेते हैं।




