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सब सुख लहै तुम्हारी सरना... हनुमान चालीसा की रचना कैसे हुई? जानें इसका महत्व

Anjali Tyagi
2 April 2026 11:24 AM IST
सब सुख लहै तुम्हारी सरना... हनुमान चालीसा की रचना कैसे हुई? जानें इसका महत्व
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नई दिल्ली। हनुमान चालीसा का आज एक अलग ही महत्व है। इसकी चौपाईयां लोगों में ऊर्जा, भयहीन, और बंजरगबली पर अटूट विश्वास को जगाती है। बता दें कि हनुमान चालीसा की रचना 16वीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा मुगल सम्राट अकबर की जेल में की गई थी।

तुलसीदास को क्यों कहा जाता था 'रामबोला'

तुलसीदास जी को बचपन में 'रामबोला' इसलिए कहा जाता था क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार, उनका जन्म एक साधारण शिशु की तरह रोने के बजाय 'राम' नाम का उच्चारण करने के साथ हुआ था। जन्म लेते ही उनके मुख से सबसे पहले 'राम' शब्द निकला, इसी कारण उनका नाम 'रामबोला' (राम बोलने वाला) पड़ गया। सामान्य शिशुओं के विपरीत, तुलसीदास जी के मुख में जन्म के समय ही बत्तीस दांत मौजूद थे। कहा जाता है कि जन्म के समय उनकी शारीरिक बनावट और स्वास्थ्य एक पांच वर्ष के बालक जैसा था।बाद में, जब उनके गुरु नरहरिदास (या नरहर्यानंद) ने उन्हें दीक्षा दी, तब उनका नाम बदलकर 'तुलसीदास' रखा गया

अकबर के हट के आगे नहीं झुके तुलसीदास

चलित कथा के अनुसार, तुलसीदास जी की ख्याति सुनकर अकबर ने उन्हें अपने दरबार में बुलाया और कोई चमत्कार दिखाने को कहा। तुलसीदास जी ने विनम्रता से उत्तर दिया कि वे केवल भगवान राम के भक्त हैं, कोई जादूगर नहीं। इस उत्तर से क्रोधित होकर अकबर ने उन्हें जेल में डाल दिया।

40 दिनों में 40 चौपाइयों की रचना

कहा जाता है कि हनुमान जी की कृपा से तुलसी दास जी ने अकबर की कैद में रहते हुए हनुमान चालीसा लिखी। उन्होंने 40 दिनों में हनुमान चालीसा की 40 चौपाइयों की रचना की। अपनी रचना में उन्होंने हनुमान जी के गुणों, शक्ति और भक्ति का वर्णन किया। कथाओं के अनुसार, 40वें दिन हजारों की संख्या में बंदरों ने अकबर की राजधानी फतेहपुर सीकरी पर हमला कर दिया औ भारी उतपात मचाया। इसके बाद अकबर को अपनी गलती का अहसास हुआ। भगवान श्री राम और हनुमान जी के प्रति तुलसी दास जी की भक्ति देखकर अकबर ने क्षमा मांगी और उन्हें आदर पूर्वक रिहा कर दिया।

हनुमान चालीसा का महत्व

डर का नाश: यह दोहा 'सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना' यह विश्वास दिलाता है कि हनुमान जी के रक्षक होने पर किसी का डर नहीं रहता।

संकटमोचन: मान्यता है कि नियमित पाठ से शारीरिक कष्ट (बीमारी) और मानसिक अशांति दूर होती है।

बुद्धि और बल: हनुमान चालीसा का पाठ ज्ञान, शक्ति और बुद्धि प्रदान करता है।

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