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युवाओं के भागकर प्रेम विवाह करने से भारतीय संस्कृति को नुकसान, सदन में बोले BJP विधायक

Aryan
24 Feb 2026 8:30 PM IST
युवाओं के भागकर प्रेम विवाह करने से भारतीय संस्कृति को नुकसान, सदन में बोले BJP विधायक
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बीजेपी विधायक ने मांग की कि एक उम्र तक युवाओं के प्रेम विवाह के मामले में अभिभावकों की सहमति जरूर होनी चाहिए

जयपुर। बीजेपी के एक विधायक ने राजस्थान विधानसभा में शून्य काल के दौरान एक खास मुद्दे उठाया। उन्होंने सदन में युवाओं के घर से भागकर प्रेम विवाह करने और लिव इन रिलेशनशिप में रहने को लेकर मुद्दा उठाया। विधायक ने कहा कि इससे भारतीय संस्कृति को भी ठेस पहुंच रही है।

भागकर शादी करने से भारतीय संस्कृति को पहुंचती है ठेस

दरअसल आहोर से बीजेपी विधायक छगन सिंह राजपुरोहित ने सदन में कहा कि आज युवक- युवतियां घर से भागकर शादी कर रहे हैं या ‘लिव इन रिलेशनशिप’ में रह रहे हैं, इससे मां-बाप के लिए समस्या पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि इससे हमारे सामाजिक ताने बाने के साथ ही भारतीय संस्कृति को भी ठेस पहुंच रही है।

बच्चों की पढ़ाई छुड़वा दी जाती है

बीजेपी विधायक ने मांग की कि एक उम्र तक युवाओं के प्रेम विवाह के मामले में अभिभावकों की सहमति जरूर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं में इस तरह की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण कभी-कभी माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई छुड़वा देते हैं, जिससे कि वो घर से बाहर न जा सकें।

लड़की माता-पिता से नाता तोड़ लेती है

इसके साथ ही बीजेपी नेता ने ये कहा कि पिछले कुछ सालों में ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं, जहां लड़की के घर से जाने पर परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन जब पुलिस ने लड़की को ढूंढा तो थाने में वह अपने माता-पिता को पहचानने से इनकार कर देती है, जिससे परिवार आहत होता है। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती इस प्रवृत्ति पर गंभीर चर्चा कर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

18 से 25 साल तक के उम्र तक युवक-युवतियों के लिए लाया जाए कानून

विधायक राजपुरोहित ने प्रस्ताव रखा कि 18 से 25 साल की उम्र के युवक-युवतियों के प्रेम विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए माता-पिता की अनिवार्य अनुमति से संबंधित कानून पर विचार किया जाए।

कम आयु में लिए गए निर्णय जीवन में जटिलता को जन्म देते हैं

उनके अनुसार, कम उम्र में लिए गए ऐसे निर्णय कई बार कानूनी और सामाजिक जटिलताओं को जन्म देते हैं। उन्होंने सरकार से व्यापक विचार-विमर्श कर ठोस अधिनियम बनाने की मांग की।


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