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लड्डू- बताशे नहीं, इन मंदिरों में लगाया जाता है भगवान को पिज्जा, नूडल्स और पानी-पुरी का भोग, जानें नाम

नई दिल्ली। देवी-देवताओं को लेकर भक्तों में गहरी आस्था होती है, जिस कारण वे पूजा-पाठ करते हैं और व्रत-उपवास भी रखते हैं। वैसे तो भगवान भक्तों का भाव देखते हैं भोग नहीं। लेकिन फिर भी लोग अपनी आस्था, श्रद्धा और सामर्थ्यनुसार भगवान को भोग जरूर अर्पित करते हैं। पूजा में देवी-देवताओं को भोग लगाने के आमतौर पर लड्डू, बताशे, पेड़े, मेवे, फल आदि का भोग लगाया जाता है। लेकिन देश में कुछ ऐसे मंदिर हैं जहां देवी को पारंपरिक खीर-पूड़ी, हलवा या लड्डू-पेड़ा नहीं, बल्कि पिज्जा, सैंडविच, बर्गर, पानी-पुरी और कोल्ड्रिंग जैसी चीजों का भोग लगाया जाता है।
भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जहां देवी-देवताओं को पिज्जा, सैंडविच और पानी-पुरी जैसे व्यंजन अर्पित किए जाते हैं:
जैन मंदिर, मुंबई
मुंबई में एक जैन मंदिर ऐसा है जहां कथित तौर पर देवी मां को सैंडविच, बर्गर और पिज्जा जैसे भोग लगाए जाते हैं।
देवी काली मंदिर, कोलकाता
कोलकाता के एक मंदिर में, जिसे "चाइनीज काली मंदिर" भी कहा जाता है, भक्तों द्वारा चीनी व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। स्थानीय चीनी समुदाय यहां आने पर नूडल्स, फ्राइड राइस और मंचूरियन चढ़ाते हैं।
रापूताना में जीविका माताजी का मंदिर
यह मंदिर लगभग 65-70 वर्ष पुराना है। जो कि राजस्थान में स्थित है। यहां भक्त अपने बच्चों की लंबी उम्र की कामना के लिए आते हैं। पहले के समय में मंदिर में केवल श्रीफल (नारियल) और साकार प्रसाद ही चढ़ाया जाता है। लेकिन बच्चों को भाने के लिए बर्गर, सैंडविच, पिज्जा जैसे व्यंजन भी चढ़ाए जाते हैं।
परमेती वेल्लूर, तमिलनाडु
तमिलनाडु के परमेती वेल्लूर में मुथु मरियम्मन मंदिर है, जहां भक्त 'प्रसाद' के रूप में पानी-पुरी, दही-पुरी, सेव-पुरी और अन्य चाट आइटम चढ़ाते हैं। यहां हर साल मई के महीने में 'चाट फेस्टिवल' का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं और इन व्यंजनों का प्रसाद लेते हैं। ये मंदिर धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय संस्कृतियों के मिश्रण का अद्भुत उदाहरण हैं, जहां पारंपरिक प्रसाद की जगह भक्तों की आस्था के अनुसार अलग-अलग तरह के खाद्य पदार्थ चढ़ाए जाते हैं।




