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किसान से पद्मश्री तक का सफर! खेमराज सुंदरियाल को मिला सम्मान...

Aryan
26 Jan 2026 8:30 PM IST
किसान से पद्मश्री तक का सफर! खेमराज सुंदरियाल को मिला सम्मान...
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खेमराज ने पानीपत उद्योग में पक्की रंगाई को बढ़ावा दिया

पानीपत। पानीपत की हैंडलूम इंडस्ट्री को नई ऊंचाई देने वाले मशहूर बुनकर व हस्तशिल्प कलाकार खेमराज सुंदरियाल को भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से नवाजा है। पानीपत के लोगों में खुशी की झलक दिखाई दे रही है। दरअसल, जामदानी कला में ऐतिहासिक प्रयोग किया। उन्होंने ऊन पर नया अध्याय रचा है। आमतौर पर जामदानी कला जो परंपरागत रूप से मलमल (कॉटन) कपड़े पर की जाती थी, खेमराज ने उसे ऊन की शॉल पर आजमाया। उनका योगदान हैंडलूम इंडस्ट्री के लिए क्रांतिकारी साबित हुआ।

कलाकृतियां होती थीं जीवंत

खेमराज सुंदरियाल ने सिर्फ परंपरागत डिजाइनों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने प्रसिद्ध कलाकार एम. एफ. हुसैन की पेंटिंग्स को वुवन टेपेस्ट्री के रूप में तैयार किया था। उनकी कलाकृतियां इतनी जीवंत होती थीं कि पहचानना मुश्किल हो जाता था कि ये कागज पर बनाई गई है।

भारत सरकार के एक विभाग से जुड़े थे

खेमराज साल 1966 में बनारस से ट्रांसफर होकर पानीपत आए। उस समय वे भारत सरकार के एक विभाग से जुड़े थे। पानीपत में आकर उन्होंने पारंपरिक खेस बुनाई में नए प्रयोग किए और खेस को बेडशीट और अन्य उत्पादों में बदलकर उद्योग को नया बाजार दिया।

वॉल हैंगिंग में किया ऐतिहासिक विकास

उन्होंने वॉल हैंगिंग को इतना विकसित किया कि बड़े-बड़े कलाकारों की पेंटिंग्स को लूम पर उसी तरह तैयार कर दिया जाता था, जैसे वे कैनवास पर हों। खेमराज सुंदरियाल की कला पानीपत की हैंडलूम इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। खेमराज ने पानीपत उद्योग में पक्की रंगाई को बढ़ावा दिया। जब शुरुआत में लोग इसके लिए तैयार नहीं थे, तब उन्होंने प्रशिक्षण दिलवाया। आज स्थिति यह है कि पूरी पानीपत इंडस्ट्री पक्की रंगाई अपना चुकी है और गुणवत्ता के मामले में टॉप क्लास मानी जाती है।

खेमराज का सफर

उत्तराखंड के सुमाड़ी गांव में जन्मे खेमराज एक किसान परिवार से आते हैं। बुनाई का उन्हें कोई पारिवारिक अनुभव नहीं था। उन्होंने पढ़ाई के दिनों में उन्हें रोज 6 किलोमीटर पैदल चलकर संस्थान जाना पड़ता था। समाज की उपेक्षा और तानों के बावजूद उन्होंने बुनाई को जीवन का लक्ष्य बना लिया।

परिवार के लिए गर्व का पल

पिछले वर्ष पद्मश्री के लिए आवेदन करने वाले खेमराज को इस वर्ष फोन कॉल के माध्यम से सम्मान की जानकारी मिली है। इससे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। उनकी पुत्रवधू ने कहा यह हमारे परिवार के लिए सपने जैसा पल है। पापा ने बहुत पहले जो कला अपनाई थी, आज वह दुनिया पहचान रही है। गौरतलब है कि खेमराज सुंदरियाल का नाम केवल एक कलाकार का नहीं, बल्कि पानीपत की हैंडलूम पहचान का पर्याय बन चुके हैं। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक रहेगा।

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