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भारत ने PSLV रॉकेट से जो 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे, जानिए वो कहां गायब हो गए?

Anjali Tyagi
12 Jan 2026 3:30 PM IST
भारत ने PSLV रॉकेट से जो 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे, जानिए वो कहां गायब हो गए?
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नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए 12 जनवरी 2026 का दिन चुनौतीपूर्ण रहा। दरअसल PSLV-C62 मिशन के दौरान 16 सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में अपने निर्धारित पथ से भटक गए और मिशन विफल हो गया। ऐसे में सवाल उठता है कि PSLV रॉकेट से जो 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे गए। वो कहां हैं। कब धरती पर गिरेंगे या अंतरिक्ष में ही घूमते रहेंगे। अंतरिक्ष में हजारों सैटेलाइट्स काम कर रहे हैं, लेकिन जब ये खराब हो जाते हैं। पुराने हो जाते हैं या ईंधन खत्म हो जाता है, तो इन्हें अंतरिक्ष में छोड़ना खतरनाक है।

16 सैटेलाइट्स के साथ क्या हुआ?

मिशन विफलता: ISRO का PSLV-C62 रॉकेट सुबह 10:17 बजे श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ था। शुरुआती दो चरण सफल रहे, लेकिन तीसरे चरण (PS3) के अंत में तकनीकी गड़बड़ी (असामान्य रोल रेट) के कारण रॉकेट अपने रास्ते से भटक गया।

खोए हुए पेलोड: इस मिशन में DRDO का रणनीतिक 'अन्वेषा' (EOS-N1) सैटेलाइट और 15 अन्य छोटे सैटेलाइट (भारत, नेपाल, और स्पेन के) शामिल थे, जो अब कक्षा में स्थापित नहीं हो सके।

वर्तमान स्थिति: ये सैटेलाइट्स और रॉकेट का मलबा अब अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) का हिस्सा बन गए हैं या धीरे-धीरे पृथ्वी के वायुमंडल में गिरकर जल जाएंगे।

खराब सैटेलाइट्स कहां गिराए जाते हैं?

जब कोई सैटेलाइट पुराना या खराब हो जाता है, तो उसे नियंत्रित तरीके से ठिकाने लगाने के लिए दो मुख्य तरीके अपनाए जाते हैं।

1. पॉइंट नेमो (Point Nemo) - अंतरिक्ष का कब्रिस्तान:

- यह प्रशांत महासागर के बीच स्थित दुनिया का सबसे दूरस्थ स्थान है, जो किसी भी इंसानी बस्ती से हजारों किलोमीटर दूर है।

- बड़े सैटेलाइट्स, स्पेस स्टेशन (जैसे भविष्य में ISS) और पुराने रॉकेट के हिस्सों को नियंत्रित तरीके से यहीं गिराया जाता है।

- अब तक यहां 300 से अधिक सैटेलाइट्स का मलबा डंप किया जा चुका है।

2. ग्रेवयार्ड ऑर्बिट (Graveyard Orbit):

- जो सैटेलाइट्स बहुत ऊंचाई (Geostationary Orbit - 36,000 km) पर होते हैं, उन्हें पृथ्वी पर वापस लाना मुश्किल होता है।

- इन्हें इनके चालू ऑर्बिट से लगभग 200-300 किमी और ऊपर धकेल दिया जाता है, जिसे 'ग्रेवयार्ड ऑर्बिट' कहते हैं। यहां ये अन्य सक्रिय सैटेलाइट्स से टकराए बिना हजारों सालों तक घूमते रह सकते हैं।

3. वायुमंडल में जलना:

- निचली कक्षा (LEO) में स्थित छोटे सैटेलाइट्स को अक्सर पृथ्वी की ओर वापस लाया जाता है। वायुमंडल के घर्षण से पैदा होने वाली गर्मी के कारण वे जमीन पर पहुंचने से पहले ही पूरी तरह जलकर राख हो जाते हैं।

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