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भगवान कार्तिकेय जिन्हे स्कंद के नाम से भी जाना जाता है, जानें उनके जन्म के अद्भुत रहस्य क्या हैं....

Aryan
23 Feb 2026 8:00 AM IST
भगवान कार्तिकेय जिन्हे स्कंद के नाम से भी जाना जाता है, जानें उनके जन्म के अद्भुत रहस्य क्या हैं....
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कार्तिक जी जिन्हें भगवान कार्तिकेय, मुरुगन या स्कंद के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। उनके जन्म का रहस्य बहुत रोचक और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। उनका जन्म विभिन्न पुराणों और कथाओं में बताया गया है, और उनके जन्म की कहानी में कई पहलू और प्रतीकात्मक अर्थ भी शामिल हैं।

कार्तिक जी के जन्म की प्रमुख कथाएं

शिव और पार्वती से जन्म: सबसे प्रसिद्ध कथा के अनुसार, भगवान शिव और देवी पार्वती के संतान के रूप में कार्तिक जी का जन्म हुआ था। एक समय शिव और पार्वती ने भगवान विष्णु से आशीर्वाद प्राप्त किया था कि उनका पुत्र शक्तिशाली और महान होगा। एक दिन, जब देवताओं और असुरों के बीच युद्ध छिड़ा था, भगवान शिव ने पार्वती से संतान प्राप्ति का निर्णय लिया। उनका जन्म एक अद्वितीय तरीके से हुआ।

पार्वती के प्रकोप से: एक अन्य कथा के अनुसार, जब पार्वती के गर्भ से कार्तिक जी का जन्म हुआ, तो उनके रूप और सौंदर्य को देखकर भगवान शिव को शक हुआ कि कहीं यह पुत्र असुरों का नहीं हो। इस पर पार्वती ने अपनी योग्यता और शक्तियों का प्रमाण देने के लिए बहुत कठिन तपस्या की और उनके द्वारा उत्पन्न ऊर्जा से कार्तिक जी का जन्म हुआ।

अग्नि से जन्म: कुछ कथाओं में कहा जाता है कि कार्तिक जी का जन्म अग्नि से हुआ। देवताओं के आदेश पर, शिव ने अपनी ऊर्जा से कार्तिक जी का निर्माण किया, और उन्हें अग्नि के भीतर रखा गया। इस तरह कार्तिक जी का जन्म हुआ, और वह बचपन में अग्नि के संपर्क से बहुत शक्तिशाली बन गए।

कार्तिक जी का रथ और सेना: कार्तिक जी के जन्म के बाद, उनका रथ और सेना के रूप में अनेक शक्तियां प्राप्त हुईं। उन्होंने अपनी सेना के साथ असुरों के खिलाफ युद्ध किया और उन्हें पराजित किया। वे विशेष रूप से भगवान शिव के वीर और शक्तिशाली अवतार माने जाते हैं, जो हमेशा धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष करते हैं।

प्रतीकात्मक अर्थ:

धार्मिक लड़ाई: कार्तिक जी का जन्म असुरों से देवताओं की रक्षा करने के लिए हुआ। उनका अस्तित्व धर्म की विजय और असुरों के विनाश का प्रतीक है।

योग्यता और ज्ञान: कार्तिक जी का रूप और उनके अस्तित्व से यह संदेश मिलता है कि शक्ति और ज्ञान एक दूसरे के पूरक होते हैं। वे हमेशा संघर्ष और पराक्रम में शामिल होते हैं, लेकिन उनके साथ-साथ उनका ज्ञान भी अत्यधिक महत्व रखता है।

दृष्टिकोण: उनका जन्म और कार्य मानवता के लिए एक दृष्टिकोण है, जहां संघर्ष से केवल विजय और प्रगति संभव है।

कार्तिक जी का जन्म और उनके कार्य आज भी हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और उन्हें विभिन्न त्योहारों, विशेषकर कार्तिक मास में पूजा जाता है। उनका व्रत, विशेष रूप से कार्तिक पूर्णिमा पर, बहुत महत्व रखता है।

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