
- Home
- /
- मुख्य समाचार
- /
- भगवान शिव के सिर्फ दो...
भगवान शिव के सिर्फ दो ही नहीं हैं संतान, जानें महादेव के सभी अंशों के नाम और जन्म कहानी

नई दिल्ली। धार्मिक ग्रंथ, वेद और पुराणों में भगवान शिव के अंशो का जिक्र मिलता है। बता दें कि भगवान शिव और माता पार्वती की मुख्य रूप से छह संतानें मानी जाती हैं, जिनमें पुत्र और पुत्रियां दोनों शामिल हैं। हमने अक्सर भगवान गणेश, कार्तिकेय का ही नाम सुना होगा। मगर शिव-शक्ति की बाकी भी संताने थी। इन संतानों की जन्म कहानियां शायद ही कोई जानता हो। बता दें कि पुराणों के अनुसार, इनमें से अधिकांश का जन्म पारंपरिक गर्भधारण के बजाय दिव्य ऊर्जा, संकल्प या विशेष परिस्थितियों से हुआ था।
भगवान शिव की प्रमुख संतानें और उनके जन्म की कथा
कार्तिकेय (मुरुगन): तारकासुर राक्षस के वध के लिए कार्तिकेय का जन्म हुआ था। भगवान शिव के तेज (दिव्य ऊर्जा) को अग्नि देव ने धारण किया, जिसे बाद में गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया गया। वहां शरद ऋतु के सरवण (नरकट) के जंगल में छह बालकों का जन्म हुआ, जिन्हें कृतिकाओं ने पाला। बाद में माता पार्वती के स्पर्श से वे छह बालक मिलकर एक हो गए और कार्तिकेय कहलाए।
गणेश (विनायक): माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन (हल्दी और चन्दन) से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राण फूँक दिए। उन्होंने गणेश को द्वारपाल बनाया था, जहाँ शिव जी के साथ हुए युद्ध के बाद उनका मस्तक हाथी के मुख से बदला गया।
अशोक सुंदरी: माता पार्वती ने अकेलेपन को दूर करने के लिए 'कल्पवृक्ष' (इच्छा पूरी करने वाला पेड़) से एक पुत्री की कामना की थी। उसी दिव्य वृक्ष के आशीर्वाद से अशोक सुंदरी का जन्म हुआ।
अयप्पा (शास्ता): जब भगवान विष्णु ने 'मोहिनी' का रूप धारण किया था, तब उनके और भगवान शिव के मिलन की ऊर्जा से भगवान अयप्पा का जन्म हुआ। उन्हें दक्षिण भारत में विशेष रूप से पूजा जाता है।
अंधक: एक बार माता पार्वती ने खेल-खेल में भगवान शिव की आंखों को पीछे से ढक लिया, जिससे पूरे संसार में अंधकार छा गया। शिव जी के पसीने की एक बूंद से एक अंधे बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम अंधक रखा गया।
मनसा देवी: इन्हें नागों की देवी माना जाता है। कुछ कथाओं के अनुसार, मनसा देवी शिव जी के तेज (वीर्य) से उत्पन्न हुई थीं जो एक पत्थर की मूर्ति पर गिरा था।
भगवान शिव के अन्य अंश
पुराणों में कुछ और नामों का उल्लेख भी मिलता है जो शिव के अंश या पुत्र माने जाते हैं।
जालंधर: शिव जी के तीसरे नेत्र की ऊर्जा जब समुद्र में गिरी, तो उससे महाप्रतापी जालंधर का जन्म हुआ।
सुकेश: एक अनाथ राक्षस बालक जिसे शिव-पार्वती ने गोद लेकर पुत्रवत पाला था।
हनुमान: उन्हें भगवान शिव का 11वां रुद्र अवतार (शिवांश) माना जाता है।




