Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य समाचार

महावीर जयंती आज: राजकुमार वर्धमान से कैसे बने 'महावीर'? जानें कैसे प्राप्त हुई ये उपाधि!

Anjali Tyagi
31 March 2026 10:29 AM IST
महावीर जयंती आज: राजकुमार वर्धमान से कैसे बने महावीर? जानें कैसे प्राप्त हुई ये उपाधि!
x

नई दिल्ली। आज देशभर में महावीर जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। यह दिन जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर, भगवान महावीर के जन्मोत्सव का प्रतीक है। महावीर सिर्फ इस नाम नहीं थे. बल्कि एक आदर्श थे। महावीर ने अपने विचारों से लाखो लोगों को प्रभावित किया। बता दें कि महावीर का सबसे प्रसिद्ध संदेश है- "जियो और जीने दो"। वे सभी जीवित प्राणियों के प्रति करुणा और समानता के प्रबल पक्षधर थे।

कौन थे भगवान महावीर?

भगवान महावीर का जन्म करीब 2600 साल पहले (ईसा पूर्व 599 या 615 के आसपास) बिहार के कुंडलपुर (वैशाली के पास) में हुआ था। उनके बचपन का नाम वर्धमान था। वे राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के पुत्र थे और एक राजसी इक्ष्वाकु वंश के राजकुमार थे। वे बचपन से ही ओजस्वी, तेजस्वी और अत्यंत दयालु स्वभाव के थे। उनके जन्म के समय राज्य में सुख-समृद्धि बढ़ी, इसलिए उन्हें 'वर्धमान' नाम दिया गया।

राजकुमार से कैसे बने 'महावीर'?

राजकुमार वर्धमान के 'महावीर' बनने की यात्रा आत्म-ज्ञान और कठिन तपस्या की कहानी है। बता दें कि वर्धमान का विवाह श्वेतांबर परंपरा के अनुसार रजकुमारी यशोदा से हुआ। हालांकि, दिगंबर परंपरा में महावीर को आजीवन ब्रह्मचारी बताया गया है। 30 वर्ष की आयु में राजकुमार वर्धमान ने सांसारिक जीवन छोड़ने का विचार किया और सबकुछ त्याग कर सत्य और ज्ञान की खोज में निकल पड़े। दीक्षा प्राप्त कर उहोंने एक साल से भी अधिक समय तक देवदुष्य वस्त्र धारण किया और इसके बाद निर्वस्त्र होकर कठिन तपस्या की और तप का मार्ग अपनाया। 12 वर्षों तक मौन, तप, उपवास और आत्मसंयम का पालन करते हुए आखिरकार 12 वर्ष बाद उन्हें ऋजुबालिका नदी के तट पर शाल वृक्ष के नीचे उन्हें केवलज्ञान (कैवल्य) की प्राप्ति हुई।

42 वर्ष में दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई

42 वर्ष में दिव्य ज्ञान की प्राप्ति के बाद भगवान महावीर स्वामी ने अपने जीवन के आगे के 30 वर्ष बिहार, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश जैसे क्षेत्रों में भ्रमण कर बिताय. इस दौरान उन्होंने धर्म का प्रचार-प्रसार भी किया. इसके बाद 72 वर्ष की आयु में कार्तिक अमावस्या पर दीपावली के दिन भगवान महावीर ने बिहार के पावापुरी में मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त किया।

'महावीर' की उपाधि

अपनी अदम्य वीरता, धैर्य और उपसर्गों (कष्टों) को सहने की क्षमता के कारण उन्हें 'महावीर' कहा गया।

भगवान महावीर की मुख्य शिक्षाएं (पंचशील सिद्धांत)

उन्होंने दुनिया को शांति और खुशहाली के लिए पांच मुख्य मार्ग बताए।

अहिंसा: किसी भी जीव को मन, वचन या कर्म से कष्ट न पहुँचाना।

सत्य: हमेशा सच बोलना और मधुर वाणी का प्रयोग करना।

अस्तेय: चोरी न करना और बिना अनुमति किसी की वस्तु न लेना।

ब्रह्मचर्य: पवित्रता और संयम का जीवन जीना।

अपरिग्रह: जरूरत से ज्यादा धन या वस्तुओं का संग्रह न करना।


Next Story