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एक ही साड़ी में माता सीता ने बिताया था 14 साल का वनवास! किसने दी थी दिव्य साड़ी, जानें इसका रहस्य

नई दिल्ली। अक्सर मन में यह सवाल आता है कि राजकुमारी सीता ने वन के कठिन 14 साल किन कपड़ों में बिताए? आखिर वह कौन सी साड़ी थी जो 14 सालों तक न कभी मैली हुई और न ही फटी? आइए जानते हैं माता सीता की उस दिव्य साड़ी के पीछे की अनसुनी कहानी। रामायण के अनुसार, वनवास के दौरान माता सीता को दिव्य साड़ी और आभूषण ऋषि अत्रि की पत्नी, माता अनसूया ने भेंट किए थे।
इस दिव्य वस्त्र का रहस्य
यह साड़ी जादुई थी, यह न तो कभी फट सकती थी और न ही कभी मैली होती थी। इसी कारण माता सीता ने पूरे 14 वर्षों के वनवास के दौरान केवल इसी वस्त्र को धारण किया। कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह वस्त्र स्वयं अग्निदेव ने माता अनसूया को प्रदान किया था, जिसमें अग्नि का तेज विद्यमान था।
अन्य उपहार
साड़ी के साथ माता अनसूया ने सीता जी को कभी न मुरझाने वाली दिव्य माला, अनमोल आभूषण, विशेष अंगराग (लेप) और इत्र भी दिया था, जिसकी सुगंध कभी समाप्त नहीं होती थी।
महत्व
जब श्रीराम, सीता और लक्ष्मण वनवास की शुरुआत में ऋषि अत्रि के आश्रम पहुँचे, तब माता अनसूया ने सीता जी को अपनी पुत्री मानकर ये भेंट दीं और उन्हें पातिव्रत्य धर्म (पति के प्रति कर्तव्य) का उपदेश भी दिया। यही कारण है कि महल के वैभवशाली वस्त्रों के बिना भी माता सीता पूरे वनवास काल में दिव्य और तेजोमयी दिखाई देती थीं।




