Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य समाचार

ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में नामग्या खम्पा ने किया भारत का प्रतिनिधित्व, जानें कौन हैं भारतीय दूतावास की प्रभारी

Shilpi Narayan
20 Feb 2026 7:00 PM IST
ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में नामग्या खम्पा ने किया भारत का प्रतिनिधित्व, जानें कौन हैं भारतीय दूतावास की प्रभारी
x

नई दिल्ली। भारत ने बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में एक पर्यवेक्षक देश के रूप में भाग लिया। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास की प्रभारी राजनयिक नामग्या खम्पा ने हिस्सा लिया है। इस बीच चर्चा हो रही है कि आखिर नामग्या खम्पा कौन हैं। हालांकि भारत ने 22 जनवरी को दावोस में आयोजित समारोह में भाग नहीं लिया था, जहां ट्रंप ने इस बोर्ड को औपचारिक रूप से लॉन्च किया था।

नामग्या खम्पा कौन हैं?

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, नामग्या सी. खम्पा 2000 बैच की इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) अधिकारी हैं। फरवरी 2026 से वह वॉशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास में चार्ज डी’अफेयर्स (Cd’A) और डिप्टी चीफ ऑफ मिशन के पद पर कार्यरत हैं। इस भूमिका में वह राजदूत की अनुपस्थिति में मिशन का नेतृत्व करती हैं और भारत-अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण राजनयिक कार्यों की देखरेख करती हैं। इससे पहले, उन्होंने केन्या में भारत की हाई कमिश्नर के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्र में भारत की राजनयिक एवं विकास साझेदारी को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी निभाई। 2023 में केन्या में हाई कमिश्नर रहते हुए उन्हें सोमालिया में भारत की राजदूत के रूप में भी मान्यता प्राप्त थी।

खम्पा को है अच्छा खासा अनुभव

केन्या में हाई कमिश्नर बनने से पूर्व खम्पा नेपाल की राजधानी काठमांडू में डिप्टी चीफ ऑफ मिशन के पद पर रहीं। उन्होंने 2002-2006 और 2013-2016 के दौरान चीन में भारतीय राजनयिक मिशन में दो बार सेवा दी। इसके अलावा, 2009-2013 तक वह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में कार्यरत रहीं। वहां रहते हुए 2011-2013 तक उन्हें यूनाइटेड नेशंस एडवाइजरी कमिटी ऑन एडमिनिस्ट्रेटिव एंड बजटरी क्वेश्चंस (ACABQ) का सदस्य चुना गया था। उन्होंने UNDP और UNFPA के एग्जीक्यूटिव बोर्ड में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

इंटरनेशनल रिलेशन में है मास्टर्स और M Phil की डिग्री

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में उन्होंने विभिन्न समय पर अमेरिका, श्रीलंका और म्यांमार से संबंधित डेस्क संभाले। 2016-2018 तक वह प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर रहीं। उन्होंने विदेश मंत्रालय में डेवलपमेंट पार्टनरशिप डिवीजन का नेतृत्व किया और 2018-2020 तक पड़ोसी देशों के साथ भारतीय अनुदान सहायता एवं विकास सहयोग का प्रबंधन किया। उनके पास इंटरनेशनल रिलेशन में मास्टर्स और M Phil की डिग्री है।

लगभग 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल

इस बीच यहां यह भी बता दें कि, वॉशिंगटन में यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में हुई इस पहली बैठक में लगभग 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें से 27 देश, जिनमें अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजरायल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, UAE, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं, बोर्ड का हिस्सा हैं। बाकी देश जिनमें भारत और यूरोपियन यूनियन शामिल हैं, ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल हुए। हाल ही में 12 फरवरी को विदेश मंत्रालय ने कहा था भारत की ओर से प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।

ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस क्या है?

ट्रंप ने पिछले महीने दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान बोर्ड ऑफ पीस की शुरुआत की थी। उन्होंने दावा किया था कि हर कोई इस बोर्ड का हिस्सा बनना चाहता है। इसे संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में भी पेश करने की कोशिश की गई है। शुरुआत में इसे गाजा में इजरायल-हमास युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण और शासन में सहायता के लिए प्रस्तावित किया गया था, लेकिन ट्रंप की महत्वाकांक्षा अब इससे कहीं आगे बढ़ चुकी है। ट्रंप अनिश्चितकाल के लिए इसकी अध्यक्षता संभाल रहे हैं।

Next Story