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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने अंटार्कटिका में लहराया परचम, भारतीय रंगमंच के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ा

नई दिल्ली। भारतीय रंगमंच के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) का बहुप्रतीक्षित स्वप्न अब सातों महाद्वीपों तक हिंदी रंगमंच की उपस्थिति दर्ज कराने के रूप में साकार हो चुका है। भारत रंग महोत्सव के तहत अंटार्कटिका के मैत्री अनुसंधान स्टेशन पर ‘गीता सार’ पर आधारित एक विशेष नाट्य प्रस्तुति ने बर्फीली धरती को भारतीय सांस्कृतिक चेतना से आलोकित कर दिया।
एनएसडी के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी का सफल रहा प्रयास
इस ऐतिहासिक पहल के पीछे एनएसडी के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी और सहायक निदेशक चेतना वशिष्ठ के संयुक्त प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से मैत्री स्टेशन पर कार्यरत भारतीय वैज्ञानिकों ने स्वयं ‘कृष्ण’ और ‘अर्जुन’ की भूमिकाएं निभाईं। बर्फ से ढकी धरती पर जब गीता का संदेश गूंजा, तो वह केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन, कर्तव्य और कर्मयोग की वैश्विक प्रतिध्वनि बन गया। प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि कर्म, समर्पण और आस्था की भावना सीमाओं से परे है। विज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत संगम ने यह सिद्ध किया कि भारतीय संस्कृति की जड़ें केवल भूगोल तक सीमित नहीं, बल्कि मानवता के हर कोने तक फैली हुई हैं।




