Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य समाचार

ना खरोंच, ना गंदगी... माता सीता ने एक ही साड़ी में बिताया था पूरा वनवास, जानें क्या है इसकी खासियत

Anjali Tyagi
29 March 2026 8:00 AM IST
ना खरोंच, ना गंदगी... माता सीता ने एक ही साड़ी में बिताया था पूरा वनवास, जानें क्या है इसकी खासियत
x

नई दिल्ली। रामायण में कई ऐसा कथाएं रही है जिनको सुनकर सभी हैरान हो जाते है। धार्मिक मान्यताओं और रामायण की कथा के अनुसार, माता सीता ने अपने 14 वर्षों के वनवास के दौरान मुख्य रूप से एक ही दिव्य साड़ी पहनी थी। इस साड़ी की कुछ अद्भुत विशेषताएं थीं जो इसे साधारण वस्त्रों से अलग बनाती थीं।

दिव्य उपहार

वनवास की शुरुआत में जब श्री राम, सीता और लक्ष्मण ऋषि अत्रि के आश्रम पहुँचे, तब ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को यह दिव्य साड़ी भेंट की थी।

कभी मैली न होना

इस साड़ी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यह कभी गंदी या मैली नहीं होती थी। धूल-मिट्टी के बीच रहने के बावजूद यह हमेशा वैसी ही चमकती रहती थी जैसे कि एकदम नई हो।

अक्षय और अभेद्य

यह साड़ी न कभी फट सकती थी और न ही इसे कोई नुकसान पहुंच सकता था। 14 वर्षों के कठिन वनवास और अशोक वाटिका में रहने के दौरान भी यह पूरी तरह सुरक्षित रही।

अग्निदेव का तेज

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता अनुसूया को यह साड़ी स्वयं अग्निदेव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर प्रदान की थी। इसमें अग्नि का तेज समाहित था, जिस कारण इस पर न तो दाग लगते थे और न ही यह जल सकती थी।

रंग और प्रतीक

माता सीता की यह दिव्य साड़ी पीले (पीताम्बर) रंग की थी। पीला रंग पवित्रता और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। रामायण में इस साड़ी का उल्लेख उनकी पवित्रता, सतीत्व और अटूट धर्म के प्रतीक के रूप में किया गया है।

साड़ी की अन्य खासियतें

माता सीता हमेशा पीले रंग (हल्का पीला) की साड़ी पहनती थीं, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। साड़ी के साथ माता अनुसूया ने सीता जी को दिव्य आभूषण भी दिए थे, जो पूरे वनवास काल में उनके साथ रहे। यह साड़ी माता सीता की पवित्रता, अटूट निष्ठा और धर्म के प्रति उनके विश्वास का प्रतीक मानी जाती है।

वाल्मीकि रामायण के कुछ प्रसंगों में यह भी उल्लेख मिलता है कि राजा दशरथ ने सीता जी को वन जाने से पहले पर्याप्त वस्त्र और आभूषण साथ ले जाने को कहा था, लेकिन अनुसूया द्वारा दी गई यह दिव्य साड़ी ही उनके पूरे वनवास काल का मुख्य आधार बनी।

Next Story