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राज्यसभा वोटिंग के दौरान गायब रहे तीनों विधायकों को भेजा गया नोटिस, 2 दिन के भीतर मांगा जवाब

Aryan
20 March 2026 11:43 AM IST
राज्यसभा वोटिंग के दौरान गायब रहे तीनों विधायकों को भेजा गया नोटिस, 2 दिन के भीतर मांगा जवाब
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ऐसी संभावना जताई जा रही है कि पार्टी इन तीनों विधायकों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। लेकिन इसका एक पहलू और भी है, जिसके कारण पार्टी के लिए कार्रवाई कर पाना आसान नहीं होगा

पटना। राज्यसभा चुनाव की वोटिंग के दौरान कांग्रेस के तीन विधायक अनुपस्थित थे, जिन्हें नोटिस भेजा गया है। इस मामले में बिहार कांग्रेस ने विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद और मनोज विश्वास से जवाब मांगा है। दरअसल बिहार में सभी 5 सीटों पर एनडीए को जीत मिली और कांग्रेस आरजेडी वाले महागठबंधन का खाता नहीं खुल पाया। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के मतदान के समय ये तीनों विधायक अनुपस्थित रहे, जिसकी वजह से महागठबंधन को हार मिली। इसे लेकर अनुशासन समिति के अध्यक्ष ने तीनों विधायकों को निर्देश दिया है कि वे इस संबंध में दो दिन के अंदर कारण बताएं।

पार्टी ने लगातार संपर्क करने की कोशिश की

जानकारी के मुताबिक, मतदान के दौरान इन विधायकों से मोबाइल फोन के माध्यम से लगातार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाया और बाद में उनके फोन ‘स्विच ऑफ' पाए गए।

कांग्रेस के सामने थी मजबूरी

ऐसी संभावना जताई जा रही है कि पार्टी इन तीनों विधायकों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। लेकिन इसका एक पहलू और भी है, जिसके कारण पार्टी के लिए कार्रवाई कर पाना आसान नहीं होगा। सूत्रों के मुताबिक, तीनों विधायकों के खिलाफ तभी कार्रवाई हो सकती है, यदि उन्होंने पार्टी का कोई आदेश नहीं माना हो। जबकि पार्टी ने इस बारे में कोई आदेश या व्हिप जारी नहीं किया था।

पार्टी ने नहीं जारी किया व्हिप

दरअसल कांग्रेस ने व्हिप जारी नहीं किया था, ऐसा करना बिहार में कांग्रेस के काम करने के तरीके सवाल खड़ा करती है। पिछले साल नवंबर में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के छह विधायक जीते थे। करीब चार महीने बीत जाने के बाद भी आज तक बिहार में कांग्रेस विधायक दल के नेता का चयन नहीं हो पाया है. विधायक दल का नेता नहीं चुने जाने का परिणाम यह हुआ कि पार्टी विधायक दल का व्हिप भी नियुक्त नहीं हो सका है। विधायक दल के नेता और व्हिप की नियुक्ति की औपचारिक और विधिवत जानकारी विधानसभा स्पीकर को देनी होती है। व्हिप का ही काम होता है कि ऐसे मौकों पर अपने विधायकों को वोट देने के लिए आदेश देना।

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