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अब मैथिली भाषा में होगी केमिस्ट्री की पढ़ाई, छात्रों की राह हुई आसान

Aryan
20 Feb 2026 4:32 PM IST
अब मैथिली भाषा में होगी केमिस्ट्री की पढ़ाई, छात्रों की राह हुई आसान
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ललित नारायण मैथिली यूनिवर्सिटी की अनूठी पहल नई शिक्षा नीति 2020 के तहत की गई है, जिसका मकसद छात्रों को मातृभाषा में एजुकेशन दिलाना है

दरभंगा। साइंस यानी विज्ञान विषय को सबसे कठिन माना जाता है। इसका मुख्य कारण विज्ञान की जटिल शब्दावली है। वहीं हमेशा अकादमिक क्षेत्र में आम धारणा रही है कि स्थानीय भाषा, मातृभाषा में किसी विषय की पढ़ाई से उस विषय को आसानी से समझा जा सकता है। इस कड़ी में एक अनूठा प्रयास किया गया है। दरअसल, भारत सरकार के कमिशन ऑफ साइंटिफिक एंड टेक्निकल टर्मिनोलॉजी ने ललित नारायण मैथिली यूनिवर्सिटी के सहयोग से केमिस्ट्री की मूलभूत शब्दावली मैथिली में तैयार कर प्रकाशित की है। बता दें कि यह पहल नई शिक्षा नीति 2020 के तहत की गई है, जिसका मकसद छात्रों को मातृभाषा में एजुकेशन दिलाना है।

शब्दावली में 3500 से अधिक मैथिली शब्द का किया गया अनुवाद

इस योजना के तहत केमिस्ट्री के लगभग 3500 से अधिक तकनीकी शब्दों का मैथिली में अनुवाद किया गया है। इन शब्दों के उपलब्ध होने के बाद 12वीं तक की केमिस्ट्री की किताबों को मैथिली में तैयार करना आसान हो जाएगा। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे मिथिलांचल के छात्रों को साइंस सब्जेक्ट समझने में आसानी होगी। वहीं नई शिक्षा नीति के तहत क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। यह शब्दावली शिक्षा नीति में एक अहम कदम मानी जा रही है। इसके अलावा एजुकेशन मिनिस्ट्री की योजना ऐसे ही अन्य विषय की किताबों को भी मैथिली में उपलब्ध कराना है।

12वीं के छात्र होंगे लाभान्वित

ऐसा माना जा रहा है कि इस शब्दावली का सीधा फायदा स्कूल स्तरीय छात्रों को मिलेगा। सबसे अधिक 12वीं तक के विद्यार्थियों को इसका फायदा होगा। तकनीकी शब्दों की उपलब्धता से केमिस्ट्री की किताबों का अनुवाद और पढ़ाई दोनों में आसानी होंगी। जानकारी के अनुसार, भविष्य में राजनीतिक शास्त्र और पत्रकारिता जैसे सब्जेक्ट की शब्दावली मैथिली में तैयार की जाएगी। इसके साथ ही अन्य क्षेत्रीय भाषाओं पर भी इसी तरह का काम किया जा रहा है। वहीं इस शब्दावली को तैयारी करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इसमें केमिस्ट्री के एक्सपर्ट के साथ हिंदी, मैथिली और इंग्लिश भाषा के एक्सपर्ट भी शामिल थे। समिति में कई एकेडमिक और प्रोफेसर ने भी योगदान दिया है। जिनमें डॉ. प्रेम मोहन मिश्र, डॉ. अवधेश कुमार मिश्र, प्रो. देवनारायण झा, डॉ. अजय कुमार मिश्र, डॉ. बीणा ठाकुर, डॉ. सुरेंद्र भारद्वाज, डॉ. संजय कुमार झा, डॉ. सविता झा और डॉ. वागीश कुमार झा के नाम शामिल है।



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