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हाय रे मेरा जिगर का टुकड़ा...एक मां का छलका दर्द, जहरीले पानी ने मासूम बच्चे की छीन ली जिंदगी

इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में फैली जल त्रासदी की सबसे मार्मिक घटना की खबर मराठी मोहल्ले से सामने आई है। दरअसल यहां एक मां की ममता हार गई। उसका बेटे लंबे इंतजार के बाद मिला था, लेकिन नगर निगम की लापरवाही की वजह से मां की गोद हमेशा के लिए सुनी हो गई। 6 माह के मासूम की मौत से सभी लोग सदमे में है।
मासूम अव्यान की गई जान
इंदौर की यह घटना केवल एक खबर नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाने वाला इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित नल के पानी ने 5 महीने के मासूम अव्यान की जान ले ली।
पानी बना जहर
दरअसल जिस मां ने अपने बच्चे के लिए गाढ़े दूध में नल का पानी मिलाया था, उसे यह नहीं पता था कि वही पानी उसके बेटे की जिंदगी छीन लेगी। जब उल्टी-दस्त होने लगा तो इसके बाद इलाज शुरू हुआ, लेकिन जहर इतना तेजी से शरीर में फैल चुका था कि मासूम की जिंदगी नहीं बच सकी।
परिजनों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि इलाके में लंबे समय से गंदा पानी आ रहा था। पानी पीने के बाद मासूम को उल्टी और दस्त हुए। परिवार की 10 साल की बेटी को भी लगातार पेट दर्द की शिकायत बनी हुई है।
प्रशासन दे जबाव
रोती हुई मां साधना ने बस एक ही सवाल पूछा कि मेरा बच्चा तो चला गया, लेकिन प्रशासन बताए कि और कितने बच्चे इस गंदे पानी का शिकार होंगे। इंदौर के हालात को देख राज्य सरकार अब जाकर सक्रिय हुई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव आज खुद भागीरथपुरा पहुंचकर पीड़ित साहू परिवार से मुलाकात करेंगे और उन्हें सांत्वना देंगे।
सरकारी व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान होता है खड़ा
इस जल त्रासदी ने एक परिवार को उजारने के साथ ही, पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। 1100 से अधिक लोग बीमार पड़े हैं और करीब 150 लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। वहीं, आधिकारिक तौर पर 7 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। बता दें कि शुरुआती जांच में नाले का गंदा पानी पीने की पाइपलाइन में मिलने की बात सामने आई है। यह सरकारी व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान खड़ा करती है, जिन पर लोगों की जिंदगी टिकी है।




