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मकर संक्रांति पर करें खिचड़ी और तिल का दान, जानें यह पर्व आज क्यों मनाया जाएगा?

मकर संक्रांति को कई क्षेत्रों में खिचड़ी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन चावल और दाल से बनी खिचड़ी का सेवन और दान अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पर्व नई फसल के आगमन का प्रतीक है और खिचड़ी को स्वास्थ्य, ग्रह शांति और समृद्धि के लिए प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है। मकर संक्रांति को लेकर इस बार कुछ लोग सोच में थे कि 14 जनवरी को मनाएं या 15 जनवरी को। दरअसल 14 जनवरी को एकादशी भी पड़ रही थी, इस दिन चावल नहीं खाया जाता है, तो ऐसे में लगभग लोग 15 जनवरी को ही यह पर्व मनाएंगे। इस दिन भगवान सुर्य की आराधना की जाती है।
आज रात्रि में 09:39 पर सूर्य का राशि परिवर्तन होगा
दरअसल बीते कल यानी 14 जनवरी 2026, बुधवार के दिन भगवान भास्कर सूर्य नारायण भगवान धनु राशि से निकलकर मकर राशि में गोचर किए। सूर्य का राशि परिवर्तन बीती रात में 09:39 पर हुआ। बता दें कि हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व सूर्य संक्रमण के बाद ही होता है। वहीं, जब कभी भी सूर्य नारायण रात्रि काल में दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उसका पुण्यकाल दूसरे दिन होता है, ऐसे में मकर संक्रांति का स्नान और दान जैसे पुण्यकार्य 15 जनवरी 2026 को किया जाएगा।
तिल की दें आहुति
घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए संक्रांति के दिन घर पर छोटा सा हवन करें और उसमें काले तिल की आहुति दें। मकर संक्रांति पर रोग, शोक, दुख-दुर्भाग्य आदि को दूर करने के लिए गंगा स्नान को अत्यंत ही पुण्यदायी बताया गया है। मकर संक्रांति के दिन स्नान के साथ दान का भी बहुत अधिक महत्व माना गया है। मकर संक्रांति के दिन तिल, गुड़, गौ के लिए खास, नया बर्तन, तिल से बनी मिठाईयां, आदि चीजों का दान करना चाहिए।




