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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बाबा रामदेव ने कहा-सनातनी आपस में ही लड़ने में व्यस्त हैं

Shilpi Narayan
24 Jan 2026 1:39 PM IST
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बाबा रामदेव ने कहा-सनातनी आपस में ही लड़ने में व्यस्त हैं
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बाबा रामदेव ने कहा- सभी संतों को 5-10 हजार गायों को पालना चाहिए। गायों को तभी बचाया जा सकता है, जब हम उनकी देखभाल करें।

प्रयागराज। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुए विवाद पर सियासत गरमा गई है। वहीं इस मामले में संत समाज में दो हिस्सा में बटे नजर आ रहे हैं। जहां कुछ संत ने अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया है तो वहीं कुछ उनका विरोध किया है। इस बीच बाबा रामदेव का इस मामले में बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि सनातनी आपस में ही लड़ने में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पहले से ही बहुत भारत विरोधी और सनातन विरोधी दुश्मन हैं और संतों को आपस में नहीं लड़ना चाहिए। गोवा में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे बाबा रामदेव ने मीडिया से बात करते हुए ये बात कही।

विवाद के बीच क्या-क्या बोले रामदेव?

बाबा रामदेव ने कहा कि गायों को बचाना सभी हिंदुओं की साझा जिम्मेदारी है। गायों को सिर्फ नारेबाजी से नहीं बचाया जा सकता। सभी संतों को 5-10 हजार गायों को पालना चाहिए। गायों को तभी बचाया जा सकता है, जब हम उनकी देखभाल करें। पतंजलि पीठ एक लाख गायों की देखभाल कर रही है। शंकराचार्यों को भी अपने आश्रम में गायों की देखभाल करनी चाहिए। सनातनी आपस में ही लड़ने में व्यस्त हैं। हमारे पहले से ही भारत विरोध, सनातन विरोधी दुश्मन हैं। ये देश विरोधी तत्व पीएम मोदी और अमित शाह को नुकसान पहुंचाने के लिए सबकुछ कर रहे हैं। ऐसे में हमारे संतों को भी हमारे नेताओं के खिलाफ मन में नाराजगी नहीं रखनी चाहिए।

माघ मेले में भी बाबा रामदेव ने इस विवाद पर दिया बयान

इससे पहले बाबा रामदेव प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में संगम में स्नान करने पहुंचे। वहां भी बाबा रामदेव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुई बदसलूकी और शंकराचार्य के विरोध पर अपनी बात रखी। बाबा रामदेव ने घटना को गलत बताया और कहा कि ऐसा व्यवहार किसी के साथ भी नहीं किया जाना चाहिए। बाबा रामदेव ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे अपने योगियों और पूजनीय संतों को भी अपमानजनक या अपशब्दों का सामना करना पड़ता है। ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है, न केवल शंकराचार्य के लिए, बल्कि किसी भी साधु के लिए। हर आदमी को अपने गौरव और गरिमा का ध्यान खुद रखना चाहिए।

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