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नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को नमन! जानें कैसे करें माता की पूजा और कथा

नई दिल्ली। नवरात्रि का आगमन हो चुका है। मां ब्रह्मचारिणी नवदुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं और नवरात्रि के दूसरे दिन इनकी विशेष पूजा की जाती है। 'ब्रह्मचारिणी' का अर्थ है 'तप का आचरण करने वाली'।
माता का स्वरूप
माता ब्रह्मचारिणी सफेद वस्त्र धारण किए हुए हैं। उनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है। वे नग्न पैर चलती हैं, जो उनकी सादगी और तपस्या का प्रतीक है।
पौराणिक कथा
पूर्व जन्म में इन्होंने हिमालय के घर पुत्री (माता पार्वती) के रूप में जन्म लिया था। भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए इन्होंने हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की, जिसके कारण इनका नाम 'ब्रह्मचारिणी' पड़ा। मां ब्रह्मचारिणी त्याग, तपस्या, संयम और अनुशासन की देवी हैं। उनकी पूजा करने से साधक के जीवन में धैर्य, साहस और आत्म-नियंत्रण बढ़ता है।
प्रिय भोग और मंत्र
प्रिय भोग: माता को चीनी, मिश्री या पंचामृत का भोग अत्यंत प्रिय है, जो लंबी आयु का वरदान देने वाला माना जाता है।
मंत्र: "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः"।
पूजा के लाभ
- भक्तों में तप, त्याग, वैराग्य और सदाचार की भावना प्रबल होती है।
- जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी मन विचलित नहीं होता और एकाग्रता बढ़ती है।
- मां की पूजा से शनि ग्रह के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
- इस दिन स्वाधिष्ठान चक्र में ध्यान करने से रचनात्मकता और भावनात्मक संतुलन प्राप्त होता




