Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य समाचार

लोकसभा में अमित शाह के संबोधन के दौरान विपक्ष का हंगामा! राहुल पर यह आरोप लगाने के बाद भड़की कांग्रेस

Shilpi Narayan
11 March 2026 6:15 PM IST
लोकसभा में अमित शाह के संबोधन के दौरान विपक्ष का हंगामा! राहुल पर यह आरोप लगाने के बाद भड़की कांग्रेस
x

नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार की ओर से गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी बात रखी है। इस दौरान अमित शाह द्वारा राहुल गांधी पर टिप्पणी के बाद सदन में जमकर हंगामा शुरू हो गया। यहां तक कि विपक्ष गृह मंत्री से माफी की मांग करने लगे। दरअसल, अमित शाह ने कहा कि 17वीं लोकसभा में कांग्रेस के 52 सांसद थे, लेकिन उनको 157 घंटे 55 मिनट बोला गया। बीजेपी के मुकाबले छह गुना अधिक समय देने का काम स्पीकर ने किया है।

जर्मनी होते हैं, इंग्लैंड होते हैं

वहीं कहा कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस 78 घंटे बोली है जबकि उनके 99 सदस्य हैं। बीजेपी के मुकाबले दो गुना समय अधिक मिला है कांग्रेस को। उनको पूछना चाहता हूं कि जब बोलने का मौका आता है, जर्मनी होते हैं, इंग्लैंड होते हैं। विपक्ष के नेता को पूछना चाहता हूं कि आप कितना बोले हैं, क्यों नहीं बोले, कौन रोका। कोई नहीं रोका। गलत प्रचार किया जा रहा है। विपक्ष के नेता की पार्टी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई है, उस पर भी नहीं बोले। क्यों लाए हो अविश्वास प्रस्ताव। बोलना नहीं चाहते, बोलना चाहते हैं तो नियमों के अनुसार बोलना नहीं आता।

यहां किसी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस नहीं होती

वहीं वेणुगोपाल ने कहा कि इतनी बार विपक्ष के नेता को टोका गया। स्पीकर के टोकने के बाद भी आप वही बात बोलोगे, तो क्यों नहीं टोका जाएगा। राजनाथ सिंह ने बोल दिया कि अप्रकाशित किताब। मैग्जीन को नहीं कोट कर सकते। उस मैग्जीन की छवि उनकी ही पार्टी की है। किसी भी वक्ता का भाषण कोई अन्य संसद सदस्य कैसे तय कर सकता है। जब मैं नहीं कह सकता, तो वो भी नहीं कह सकते। मुझे डिस्टर्ब किया और फिर उनको आइडिया आया कि मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस हो। ये लोकसभा है। यहां किसी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस नहीं होती।

17वीं लोकसभा में विपक्ष को 40 फीसदी समय दिया गया

ओम बिरला ने सदन का स्तर ना गिरने देकर इस पर उपकार किया है। 17वीं लोकसभा में विपक्ष को 40 फीसदी समय दिया गया। शून्यकाल में विपक्ष की भागीदारी 55 प्रतिशत रही है। ये कहते हैं कि हमें बोलने नहीं देते। किसको बोलना है, यह अधिकार उस दल के नेता का है। आप खुद नहीं बोलना चाहते, तो कौन बोलवा सकता है। अविश्वास प्रस्ताव पर बोल सकते थे। नियम तोड़कर बोलने की इजाजत किसी को नहीं।

Next Story