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नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को नमन! जानें पूजा विधि, मंत्र और कथा

Anjali Tyagi
26 March 2026 8:00 AM IST
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को नमन! जानें पूजा विधि, मंत्र और कथा
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नई दिल्ली। आज नवरात्रि का आठवां दिन है, जो मां दुर्गा के आठवें स्वरूप देवी महागौरी को समर्पित है। इन्हें शांति, पवित्रता और सौभाग्य की देवी माना जाता है। मां महागौरी की पूजा सभी कामनाओं को पूरा करने वाली मानी गई है। मान्यता है​ कि जो कोई साधक मां महागौरी की पूजा सच्चे मन से करता है, उस पर देवी प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाती हैं।

मां महागौरी की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए देवी पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। लंबे समय तक धूप, धूल और वर्षा सहने के कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। जब भगवान शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए, तो उन्होंने गंगा जल से देवी को स्नान कराया। गंगा जल के स्पर्श से उनका शरीर विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान और गौर हो गया, जिसके कारण उनका नाम 'महागौरी' पड़ा।

पूजा विधि

महागौरी की पूजा अत्यंत शांत भाव से करनी चाहिए:

- इस दिन भक्त सफेद, गुलाबी या हल्के रंग के वस्त्र धारण कर सकते हैं।

- सबसे पहले कलश पूजन करें, फिर मां की मूर्ति या चित्र पर चंदन, रोली, अक्षत और सिंदूर लगाएं।

- माता को सफेद फूल, विशेषकर मोगरा या चमेली अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।

- पूजा के दौरान इस बीज मंत्र का जाप करें: “ॐ देवी महागौर्यै नमः॥”।

- अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है, जहाँ छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर भोजन कराया जाता है।

भोग (प्रसाद)

मां महागौरी को नारियल अत्यंत प्रिय है। आप उन्हें निम्नलिखित का भोग लगा सकते हैं:

- नारियल का फल या नारियल से बनी बर्फी/लड्डू।

- नारियल की खीर।

- हलवा, पूरी और काले चने (अष्टमी के परंपरागत प्रसाद के रूप में)।

मां महागौरी स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

कैसा है मां महागौरी का स्वरूप

नवरात्रि की आठवें दिन की देवी हैं महागौरी। मां महागौरी अत्यंत सौम्य और कोमल स्वभाव की देवी हैं। चार भुजाओं से सुशोभित माता के एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में डमरु, तीसरे हाथ में अभय मुद्रा और चौथे हाथ में वरमुद्रा रहती है। मां श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और उनका रंग गोरा है। मां महागौरी वृषभ यानी की बैल की सवारी करती हैं। महागौरी को श्वेतांबरधरा और अन्नपूर्णा का स्वरूप भी माना जाता है।

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