Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य समाचार

पीएम मोदी ने 77वें गणतंत्र दिवस पर पहनी मरून रंग की पगड़ी! 11 वर्षों में पीएम ने पहने ये साफे... जानें क्या है साफे का महत्व

Anjali Tyagi
26 Jan 2026 11:47 AM IST
पीएम मोदी ने 77वें गणतंत्र दिवस पर पहनी मरून रंग की पगड़ी! 11 वर्षों में पीएम ने पहने ये साफे... जानें क्या है साफे का महत्व
x

नई दिल्ली। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष गहरे मरून (मजेंटा और वाइन रेड) रंग की राजस्थानी पगड़ी पहनी, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। पीएम मोदी ने इस गणतंत्र दिवस के मौके पर मरून रंग की पगड़ी पहनी है। गौरतलब है कि साल 2016 से वर्ष 2026 तक पीएम मोदी हर बार एक नए अंदाज में नजर आए हैं।

साफे का रंग और डिजाइन

पीएम मोदी ने गहरे मरून और वाइन रेड रंग का राजस्थानी साफा पहना था। इस पर सुनहरे बूटा-शैली के मोटिफ बने हुए थे, जो राजस्थान के मारवाड़-मेवाड़ क्षेत्र की पारंपरिक शाही पोशाक का प्रतीक है। साफे के किनारों पर मल्टीकलर स्ट्राइप्स (हरी, पीली और नीली धारियां) थीं, जो राजस्थान की जीवंत उत्सव संस्कृति और भारत की 'विविधता में एकता' को दर्शाती हैं। यह साफा सूती-रेशम के हैंडलूम कपड़े से बना था। इसमें सामने की ओर 'कलगी' जैसी पंखे की आकृति की डिटेलिंग थी, जो इसे एक राजसी (Regal) लुक दे रही थी। प्रधानमंत्री ने इस पगड़ी के साथ नेवी ब्लू रंग का कुर्ता, हल्के नीले रंग की नेहरू जैकेट और सफेद पायजामा पहना था। यह परंपरा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हर साल गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस पर देश के विभिन्न क्षेत्रों की विरासत और कला (जैसे बांधनी, लहरिया, हलारी पगड़ी) को प्रदर्शित करने के उनके निरंतर प्रयास का हिस्सा है।

विशेष अर्थ (ऑपरेशन सिंदूर)

इस बार की मरून पगड़ी 'ऑपरेशन सिंदूर' को एक श्रद्धांजलि के रूप में देखी जा रही है, जो देश के वीर शहीदों और सैन्य प्रयासों के प्रति सम्मान प्रकट करती है।

क्या है साफे का महत्व

भारतीय संस्कृति, विशेषकर राजस्थान में, साफा व्यक्ति के सम्मान और प्रतिष्ठा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। किसी के सामने साफा उतारने का अर्थ अपना सब कुछ समर्पित करना या हार मान लेना होता है। साफे के बांधने के तरीके और उसके रंग से व्यक्ति के क्षेत्र और समुदाय की पहचान होती है। उदाहरण के लिए, जोधपुरी, मेवाड़ी और जयपुरी साफे अपनी विशिष्ट शैलियों के लिए जाने जाते हैं। यह पूर्वजों की परंपराओं को जीवित रखने का एक माध्यम है। विवाह, त्योहारों और विशेष उत्सवों पर साफा पहनना अनिवार्य माना जाता है, जो उत्सव की गरिमा बढ़ाता है। 'पगड़ी बदल भाई' बनाने की परंपरा दो व्यक्तियों या परिवारों के बीच अटूट रिश्ते और भरोसे को दर्शाती है। पुराने समय में, साफा केवल पहनावा नहीं बल्कि धूप, गर्मी और युद्ध के दौरान सिर की रक्षा करने का एक व्यावहारिक साधन भी था।

11 वर्षों (2014-2024) में पीएम मोदी द्वारा पहनी गए साफे

2026: मरून (लाल) रेशमी पगड़ी, जिस पर सुनहरे मोर के मोटिफ और ज़री का काम है।

2025: केसरिया (Saffron) रंग का साफा, जिस पर लाल और पीले रंग के शेड्स थे।

2024: बहु-रंगी बांधनी (Bandhani) साफा, जिसमें केसरिया, गुलाबी, सफेद और पीले रंग शामिल थे।

2023: बांधनी और लहरिया (Leheriya) प्रिंट वाली राजस्थानी पगड़ी, जिसमें पीला, हरा और लाल रंग था।

2022: उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी, जिस पर राज्य पुष्प 'ब्रह्मकमल' बना हुआ था।

2021: जामनगर के शाही परिवार द्वारा भेंट की गई 'हालारी' (Halari) पगड़ी, जो लाल रंग की थी और उस पर पीले डॉट्स थे।

2020: केसरिया रंग की पगड़ी, जिस पर लाल रंग के छोटे प्रिंट थे और एक सिरा कमर तक लटकता था।

2019: पीले और केसरिया रंग का साफा, जिसमें लाल और सुनहरी रेखाएं शामिल थीं।

2018: बहु-रंगी साफा (लाल, पीला, केसरिया, नीला), जो राजस्थानी शैली का था।

2017: गुलाबी रंग की पगड़ी, जिस पर सुनहरे रंग का काम था।

2016: पीले रंग की पगड़ी, जिस पर लाल और हरे रंग की पट्टियां बनी हुई थीं।

2015: पहले गणतंत्र दिवस पर उन्होंने लाल रंग का 'जोधपुरी बांधनी' साफा पहना था।

Next Story