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कभी राजा जयसिंह पुरा का किला हुआ करता था दिल्ली का सबसे प्रसिद्ध गुरुद्वारा , जानें कैसा बना आस्था का प्रतीक

नई दिल्ली। दिल्ली में तो वैसे कई सारे गुरुद्वारे हैं लेकिन सबसे प्रसिद्ध गुरुद्वारा बंगला साहिब गुरुद्वारा को ही माना जाता है। मान्यता है कि यह देश के सबसे बड़े सिख तीर्थस्थलों में से एक है। गुरुद्वारा बंगला साहिब दिल्ली का एक प्रमुख और ऐतिहासिक गुरुद्वारा है, जो अपने सुनहरे गुंबद और पवित्र सरोवर के लिए जाना जाता है, जिसका निर्माण मूलतः जयपुर के महाराजा जयसिंह पुरा के बंगले में हुआ था और यह सिखों के आठवें गुरु, गुरु हरकिशन सिंह जी से जुड़ा है, जो चेचक और हैजा जैसी बीमारियों के इलाज के लिए जाने जाते हैं। यह स्थान आज भी लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है और यहाँ हर समय लंगर व सेवा की व्यवस्था होती है।
मुख्य विशेषताएं और इतिहास
यह आठवें सिख गुरु, गुरु हरकिशन सिंह जी से जुड़ा है, जो दिल्ली प्रवास के दौरान यहां रुके थे और अपने निवास स्थान से पानी पिलाकर लोगों की सेवा करते थे, जिससे बीमारियाँ ठीक हुईं। गुरुद्वारे के बीच में एक सरोवर है, जिसका जल पवित्र और आरोग्यकारी माना जाता है, और श्रद्धालु इसे अमृत के रूप में ले जाते हैं।
निर्माण: इसका निर्माण 1783 में सिख जनरल सरदार भगेल सिंह ने करवाया था।
लंगर: यहां 24 घंटे लंगर चलता है, जहाँ हर धर्म और वर्ग के लोगों को मुफ्त भोजन कराया जाता है, जो समानता और सेवाभाव का प्रतीक है।
अन्य सुविधाएँ: परिसर में एक प्रार्थना कक्ष, अस्पताल, स्कूल और संग्रहालय भी हैं, जो गुरुद्वारे की सेवा भावना को दर्शाते हैं।
पर्यटन: यह दिल्ली के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है, जहाँ देश-विदेश से लाखों पर्यटक आते हैं।
क्या करें और क्या न करें
पोशाक: शालीन कपड़े पहनें और सिर ढकने के लिए स्कार्फ (रूमाल) साथ रखें; परिसर में रूमाल उपलब्ध होते हैं।
जूते: जूते आसानी से उतारे जा सकें, ऐसे पहनें; जूते काउंटर पर रखे जाते हैं।
शांति: परिसर में शांति बनाए रखें और मर्यादा का पालन करें।
फोटोग्राफी: मुख्य भवन के अंदर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। गुरुद्वारा बंगला साहिब न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि मानवता, सेवा और समानता का एक अद्भुत प्रतीक भी है।




