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दुर्लभ संयोग: जब तीन बड़े धर्मों का उपवास एक ही दिन होगा, जानें तारीख

Anjali Tyagi
18 Feb 2026 2:30 PM IST
दुर्लभ संयोग: जब तीन बड़े धर्मों का उपवास एक ही दिन होगा, जानें तारीख
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करीब 30 दिनों के अंतराल में तीनों धर्मों में श्रद्धालु व्रत, प्रार्थना और आत्मसंयम का पालन करेंगे.

नई दिल्ली। वर्ष 2026 में दुनिया के तीन सबसे बड़े धर्मों ईसाई, इस्लाम और सनातन (हिंदू) के पवित्र व्रत और उपवास का समय एक साथ मिल रहा है। यह एक दुर्लभ संयोग है जहां आध्यात्मिक शुद्धिकरण, संयम और भक्ति के ये महापर्व एक ही कालखंड के आसपास पड़ रहे हैं।

ईसाई धर्म (लेंट/Lent): 2026 में ऐश वेडनेसडे 18 फरवरी को है, जो 40 दिनों के उपवास और प्रार्थना की अवधि 'लेंट' की शुरुआत करता है। यह उपवास 5 अप्रैल को ईस्टर संडे तक चलता है।

इस्लाम (रमजान): इस्लाम का सबसे पवित्र महीना रमजान भारत में 19 फरवरी से शुरू हो रहा है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं। रोजा केवल भोजन से दूर रहने का नियम नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, दान और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक होता है। रमजान में सहरी और इफ्तार का विशेष महत्व होता है। सहरी सूर्योदय से पहले खाया जाने वाला भोजन होता है, जबकि इफ्तार सूर्यास्त के बाद रोजा खोलने की प्रक्रिया है। इस दौरान गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना भी इस्लाम में बहुत पुण्य कार्य माना गया है।

सनातन धर्म (चैत्र नवरात्रि): हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि का महापर्व 19 मार्च 2026 बृहस्पतिवार से शुरू होगा। नौ दिनों तक चलने वाली यह श्रद्धा और शक्ति की साधना 27 मार्च 2026, शुक्रवार को संपन्न होगी। नवरात्रि के दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं। यह समय आत्म-शुद्धि, सात्विक भोजन और मानसिक शांति का होता है। वसंत ऋतु के आगमन के साथ यह पर्व नई ऊर्जा का संचार करता है।

इस संयोग का महत्व

एक साथ उपवास: 18 और 19 फरवरी के आसपास का समय वह दुर्लभ क्षण है जब दुनिया की एक बड़ी आबादी—चाहे वे ईसाई हों, मुस्लिम हों या हिंदू (महाशिवरात्रि के अवसर पर)—एक साथ उपवास और आध्यात्मिक चिंतन में संलग्न हैं।

आध्यात्मिक मिलन: रमजान के खत्म होते ही (लगभग 19 मार्च) सनातन धर्म के नववर्ष और नवरात्रि का प्रारंभ हो रहा है, जो इसे भक्ति और उत्सव का एक लंबा निरंतर कालखंड बनाता है।

कैलेंडर का तालमेल: सौर और चंद्र कैलेंडरों के बीच के अंतर के कारण ऐसे संयोग कई वर्षों (अक्सर 30 साल से अधिक के चक्र) में एक बार बनते हैं जब ये प्रमुख तिथियां इस तरह एक-दूसरे के करीब आती हैं।

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