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लोहड़ी पर आप भी पाएं गुरु का आशीर्वाद! इन प्रसिद्ध गुरुद्वारों में दर्शन के लिए जरूर जाएं, मिलेगा सुखद अनुभव

Anjali Tyagi
10 Jan 2026 3:30 PM IST
लोहड़ी पर आप भी पाएं गुरु का आशीर्वाद! इन प्रसिद्ध गुरुद्वारों में दर्शन के लिए जरूर जाएं, मिलेगा सुखद अनुभव
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नई दिल्ली। लोहड़ी 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) को मनाई जाएगी। यह पर्व हर वर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पहले आता है और शीत ऋतु के विदा होने तथा रबी फसल के स्वागत का संकेत देता है। ऐसे में आप भी गुरू की कृपा काना चाहते है तो इन प्रसिद्ध गुरुद्वारों में दर्शन के लिए जरूर जाएं। 2026 में लोहड़ी के अवसर पर इन ऐतिहासिक और पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन करना एक सुखद अनुभव हो सकता है।

श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर), अमृतसर

सिख धर्म का सबसे पवित्र स्थान है। लोहड़ी पर यहाँ की भव्यता, शबद-कीर्तन और पवित्र सरोवर की परिक्रमा आत्मिक शांति प्रदान करती है। सिख धर्म का सबसे पवित्र गुरुद्वारा अमृतसर में स्थित है। श्री हरमंदिर साहिब को स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है, क्योंकि इसपर सोने की परत चढ़ी है। इसकी नींव संत हजरत मियां मीर ने रखी थी और निर्माण गुरु अर्जन देव जी ने कराया था।

तख्त श्री केसगढ़ साहिब, आनंदपुर साहिब

पंजाब के आनंदपुर साहिब में स्थित सिखों के पांच तख्तों में से एक है। ये खालसा पंथ की जन्मभूमि है। यहां गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में खालसा की नींव रखी थी। लोहड़ी के दिन यहां विशेष दीवान और अरदास होती है।

गुरुद्वारा बंगला साहिब, दिल्ली

दिल्ली का हृदय। लोहड़ी पर यहां हजारों श्रद्धालु मत्था टेकते हैं। सरोवर और लंगर सेवा मन को स्थिर कर देती है। गुरुद्वारा बंगला साहिब नई दिल्ली में स्थित एक प्रमुख और पवित्र सिख गुरुद्वारा है, जो 8वें सिख गुरु श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी से जुड़ा है और ऐतिहासिक रूप से राजा जय सिंह के बंगले में बना है। यह अपने पवित्र सरोवर और विशाल लंगर के लिए प्रसिद्ध है।

गुरुद्वारा शीशगंज साहिब, दिल्ली

गुरु तेग बहादुर जी की शहादत से जुड़ा यह स्थान लोहड़ी पर त्याग और सत्य की याद दिलाता है। दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित इस ऐतिहासिक गुरुद्वारा को नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर की शहादत की याद में 1783 में बघेल सिंह द्वारा बनवाया गया था।

गुरुद्वारा दमदमा साहिब, तलवंडी साबो

पंजाब के बठिंडा में गुरुद्वारा दमदमा साहिब है। यह ‘गुरुओं की काशी’ के नाम से प्रसिद्ध है। लोहड़ी पर यहां आध्यात्मिक वातावरण विशेष होता है। यह गुरुद्वारा सिख धर्म के पांच तख्तों (सिंहासनों) में से एक है, जो पंजाब के बठिंडा जिले में स्थित है। यह वह पवित्र स्थान है जहां गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरु ग्रंथ साहिब को अंतिम रूप दिया और स्थापित किया था।

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