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स्वार्थ और दूसरों पर काबू पाने की इच्छा है इन विवादों की जड़...मीडिल ईस्ट में जारी जंग पर बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत

Shilpi Narayan
20 March 2026 2:31 PM IST
स्वार्थ और दूसरों पर काबू पाने की इच्छा है इन विवादों की जड़...मीडिल ईस्ट में जारी जंग पर बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत
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नागपुर। खाड़ी देशों में लगातार तनाव बढ़ रहा है। जिसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। इस बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया में बढ़ते तनाव को लेकर बयान दिया है। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि आखिर क्यों दुनिया में शांति नहीं हो पा रही है। भागवत ने स्वार्थ और दूसरों पर काबू पाने की इच्छा को इन विवादों की जड़ बताया।

दुनिया में लगातार संघर्ष और विवाद बने हुए हैं

उन्होंने कहा कि जब तक लोग अपनी सोच नहीं बदलेंगे, तब तक शांति संभव नहीं है। भारत के प्राचीन ज्ञान को उन्होंने दुनिया की समस्याओं का समाधान बताया। उनका कहना है कि पूरी दुनिया को एक परिवार की तरह देखना ही सुख का रास्ता है। दरअसल, आरएसएस प्रमुख नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के नए दफतर के भूमि पूजन कार्यक्रम में बोल रहे थे। मोहन भागवत ने कहा कि पिछले दो हजार वर्षों से दुनिया में शांति के लिए कई प्रयोग किए गए। लेकिन इनमें से कोई भी पूरी तरह सफल नहीं हुआ। आज भी धार्मिक कट्टरता और जबरन धर्म परिवर्तन जैसी समस्याएं मौजूद हैं। लोग खुद को दूसरों से बड़ा और दूसरों को छोटा समझते हैं। यही वजह है कि दुनिया में लगातार संघर्ष और विवाद बने हुए हैं।

शांति केवल बातों से नहीं आएगी

संघ प्रमुख ने कहा कि शांति केवल बातों से नहीं आएगी। इसके लिए एकता, अनुशासन और धर्म के रास्ते पर चलना होगा। उन्होंने कहा कि धर्म केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे लोगों के व्यवहार और आचरण में दिखना चाहिए। अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पालन करने के लिए मेहनत और त्याग की जरूरत होती है। जब तक समाज में अनुशासन नहीं होगा, तब तक हम एक बेहतर दुनिया की कल्पना नहीं कर सकते।

भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है

भागवत ने कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है कि हम सब एक हैं और आपस में जुड़े हुए हैं। दुनिया को अब टकराव छोड़कर तालमेल और सहयोग की तरफ बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अब आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी बात को मान रहा है। भारत मानवता के नियम का पालन करता है, जबकि दूसरे 'सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट' में विश्वास करते हैं। यही वजह है कि दुनिया के कई हिस्से केवल ताकतवर के जीवित रहने की बात करते हैं। दुनिया को संघर्ष की नहीं बल्कि आपसी मेलजोल की जरूरत है।

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