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प्रयागराज के माघ मेले में धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की बिगड़ी तबीयत

प्रयागराज। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन से ही धरने पर बैठे हैं। वहीं उनको लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसर, अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ गई है। शंकराचार्य बीते 6 दिनों से धरने पर बैठे हैं। जानकारी के अनुसार शंकराचार्य को बुखार आ गया है। वह अभी तक दिन में सिर्फ 2 बार पालकी पर आए हैं। कहा जा रहा है कि फिलहाल वह अपने वैन में आराम कर रहे हैं।
संगम स्नान से रोकना
18 जनवरी 2026 (मौनी अमावस्या) के दिन शंकराचार्य अपने समर्थकों के साथ शाही रथ/पालकी में संगम स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा कारणों (बिना पूर्व अनुमति के प्रतिबंधित मार्ग का उपयोग) का हवाला देते हुए उनके काफिले को रोक दिया।
शिष्यों के साथ मारपीट का आरोप
शंकराचार्य के समर्थकों का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और लाठीचार्ज किया, जिसमें कई शिष्य घायल हो गए। इस दुर्व्यवहार से नाराज होकर स्वामी जी ने बीच रास्ते से ही वापस लौटने का फैसला किया और बिना स्नान किए अपने शिविर के बाहर सड़क पर धरने पर बैठ गए।
शंकराचार्य की पदवी पर नोटिस
विवाद तब और बढ़ गया जब माघ मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर उनके 'शंकराचार्य' उपाधि के उपयोग पर सवाल उठाया। प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश का हवाला दिया कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की नियुक्ति अभी तक अंतिम रूप से तय नहीं हुई है। स्वामी जी ने इसे धर्म और परंपरा का अपमान बताया है।
गौ-रक्षा की मांग
वे लंबे समय से 'गौ माता' को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा दिलाने और पूरे देश में गोवंश हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रशासन इस अपमान के लिए माफी नहीं मांगता और उन्हें उचित सम्मान के साथ स्नान नहीं कराया जाता, वे अपना विरोध जारी रखेंगे।




