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Shivaji Maharaj Jayanti: 15 साल की उम्र में बेजोड़ साहस... मराठा साम्राज्य का वो योद्धा जिसका नाम सुन थर-थर कांपते थे मुगल

Anjali Tyagi
19 Feb 2026 11:29 AM IST
Shivaji Maharaj Jayanti: 15 साल की उम्र में बेजोड़ साहस... मराठा साम्राज्य का वो योद्धा जिसका नाम सुन थर-थर कांपते थे मुगल
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नई दिल्ली। छत्रपति शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व और उनका जीवन केवल इतिहास नहीं, बल्कि साहस, नैतिकता और रणनीतिक कौशल का एक जीवंत ग्रंथ है। मात्र 15-16 वर्ष की आयु में, जहां अधिकांश किशोर भविष्य की चिंता में होते हैं, शिवाजी राजे ने 'हिंदवी स्वराज्य' का संकल्प लिया था।

शिवाजी कौन थे?

शिवाजी जन्म से कोई राजकुमार नहीं थे, जिसे राजसिंहासन मिल गया। उनके पिता बीजापुर सल्तनत में दरबारी थे। शिवाजी ने तो खुद अपनी रणनीतियों, साहस और सूझबूझ से एक नया साम्राज्य खड़ा किया। एक नए राज्य की नींव रखी। जब कई लोग इस कोशिश में लगे रहते थे कि उन्हें बस राजा के प्रति अपनी वफादारी साबित करके या राजा का विश्वास जीतकर राजमहल में अपनी जगह बनानी है, शिवाजी का मिशन सबसे अलग था। उन्होंने इसके लिए योजना बनाई और उसे पूरा किया। उन्होंने मराठा साम्राज्य की स्थापना की, जिसे हिन्दवी स्वराज्य के नाम से भी जाना जाता है।

1. पहली जीत: तोरण किले की विजय

1646 में, मात्र 16 वर्ष की आयु में, शिवाजी महाराज ने बीजापुर के सुल्तान के नियंत्रण वाले तोरण किले पर विजय प्राप्त की। यह उनके स्वराज्य के सपने की पहली ईंट थी। इसी समय उन्होंने रोहिडेश्वर मंदिर में अपने मित्रों के साथ स्वराज्य स्थापना की शपथ ली थी।

2. 'हिंदवी स्वराज्य' का अर्थ

उनका लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं था। 'हिंदवी स्वराज्य' का अर्थ था—एक ऐसा राज्य जो यहाँ की भूमि के पुत्रों का हो, जहाँ न्याय हो, और जहाँ हर धर्म-जाति के व्यक्ति को सम्मान मिले। उन्होंने 'मराठी' भाषा और संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए 'राज्यव्यवहार कोश' भी तैयार करवाया।

3. युद्ध कौशल: गनिमी कावा

शिवाजी महाराज को 'Father of Indian Navy' और 'Mountain Rats' (मुगलों द्वारा दिया गया नाम) कहा जाता है।

रणनीति: उन्होंने सीधे युद्ध के बजाय ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों और घने जंगलों का उपयोग करके 'छापामार युद्ध' (Guerrilla Warfare) की तकनीक विकसित की।

नौसेना: उन्होंने कोंकण तट की रक्षा के लिए एक शक्तिशाली नौसेना खड़ी की और सिंधुदुर्ग, विजयदुर्ग जैसे समुद्री किले बनवाए।

4. अद्वितीय प्रशासन और नैतिकता

वे एक कुशल प्रशासक थे। उन्होंने 'अष्टप्रधान मंडल' (आठ मंत्रियों की परिषद) का गठन किया। युद्ध में जीती गई महिलाओं के प्रति उनका व्यवहार अत्यंत सम्मानजनक था (जैसे कल्याण के सूबेदार की बहू का प्रसंग)। उन्होंने जागीरदारी प्रथा को कम कर सीधे किसानों से संपर्क साधा और राजस्व प्रणाली को सुधारा।

5. ऐतिहासिक संघर्ष

शिवाजी महाराज का जीवन बड़े संकटों और उनसे निकलने की कहानियों से भरा है:

अफजल खान का वध (1659): अपनी चतुराई और 'वाघ नख' से विशालकाय अफजल खान को परास्त करना।

आगरा से पलायन (1666): औरंगजेब की कैद से फलों की टोकरी में छिपकर निकलना, जो आज भी दुनिया के सबसे साहसी 'एस्केप' मिशनों में गिना जाता है।

राज्याभिषेक (1674): रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक भारतीय इतिहास की एक युगांतरकारी घटना थी।

कौन थे शिवाजी के गुरू?

शिवाजी महाराज के गुरु समर्थ रामदास थे, जिन्हें हिंदू पद पादशाही के संस्थापक माना जाता है। उन्होंने मराठी में ‘दासबोध’ ग्रंथ लिखा और कश्मीर से कन्याकुमारी तक 1,100 मठ-अखाड़े स्थापित किए। उन्हें हनुमान जी का अवतार माना जाता था क्योंकि वे हनुमान भक्त थे। शिवाजी महाराज अपने गुरु से प्रेरणा लेकर ही बड़े फैसले लेते थे।

शिवाजी का विवाह किससे हुआ था?

शिवाजी महाराज का विवाह 14 मई 1640 को सइबाई निम्बालकर से लाल महल पूना में हुआ था. उनका ज्येष्ठ पुत्र संभाजी था जिन्‍होंने 1680 से 1689 तक राज किया. संभाजी की पत्नी येसुबाई थी और उनका पुत्र राजाराम उत्तराधिकारी बना।

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